बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपियों में से मुख्य व्यक्तियों का परिचय

Edited By Ramkesh, Updated: 30 Sep, 2020 08:41 PM

babri masjid demolition case introduces key people out of 32 accused

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपियों में से कुछ मुख्य व्यक्तियों का परिचय इस प्रकार हैं जिन्हें बुधवार को लखनऊ में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।

लखनऊ: बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपियों में से कुछ मुख्य व्यक्तियों का परिचय इस प्रकार हैं जिन्हें बुधवार को लखनऊ में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।

लाल कृष्ण आडवाणी : रामजन्मभूमि आंदोलन का राजनीतिक चेहरा रहे आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित कई अन्य आरोपियों के साथ मंच पर मौजूद थे जब कारसेवकों की भीड़ ने छह दिसम्बर 1992 को मस्जिद ढहाया था। बाद में उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे दुखद दिन बताया।उनका यह बयान भाजपा के हिंदुत्व समर्थकों को रास नहीं आया था। अब 92 वर्ष के हो चले आडवाणी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं लेकिन उनके और अन्य आरोपियों के पक्ष में फैसला आना उनके लिए बड़ी राहत की बात है। विवादित स्थल पर मंदिर बनाने के पक्ष में 1990 की उनकी च्रथ यात्रा' के कारण ही यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र बिंदु में आया और भाजपा को कांग्रेस के विकल्प के तौर पर उभरने का मौका मिला।

 मुरली मनोहर जोशी : राम मंदिर निर्माण के अभियान के तहत जब हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए और मस्जिद को ढहा दिया गया उस समय जोशी भाजपा के अध्यक्ष थे। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समकालीन जोशी 1980 और 1990 के दशक में पार्टी का मुख्य चेहरा थे। 86 वर्ष की उम्र में आडवाणी की ही तरह वह अब राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। वह उत्तरप्रदेश से कई बार सांसद रहे और आरएसएस के नजदीकी माने जाते हैं।

कल्याण सिंह : भाजपा के वरिष्ठ नेता सिंह मस्जिद ढहाए जाने के वक्त उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनकी सरकार को केंद्र ने बर्खास्त कर दिया था क्योंकि उन्होंने आश्वासन दिया था कि च्कार सेवा' के दौरान हिंसा की अनुमति नहीं होगी और मस्जिद सुरक्षित रहेगी। राज्य सरकार के मुखिया के तौर पर ढांचा ढहाए जाने के लिए कई लोगों ने उन्हें च्च्मुख्य दोषी'' माना लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को निर्दोष बताया। वह भाजपा के ऐसे नेता हैं जिनका राजनीतिक कॅरियर तबाह हो गया क्योंकि सरकार को बर्खास्त करने के समय पार्टी उत्तरप्रदेश में बहुमत में थी और उस तरह की जीत उन्हें फिर नहीं मिल सकी। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद के कारण दो बार उन्हें भाजपा छोडऩी पड़ी और अंतत: फिर उन्होंने पार्टी में वापसी की। 88 वर्ष की उम्र में सिंह अब राजनीति में सक्रिय नहीं हैं।

उमा भारती : आंदोलन के सबसे चर्चित महिला चेहरों में शामिल रहीं भारती को च्साध्वी' के नाम से भी जाना जाता है। मस्जिद ढहाए जाते समय उन्हें उत्साहित और भावुक होते देखा गया। उन्होंने कहा कि यह आकस्मिक घटना थी न कि इसमें कोई षड्यंत्र था। वह अकसर कहती हैं कि जो भी हुआ, वह सबके सामने हुआ और इसमें छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। घटना को लेकर उन्होंने कभी खेद नहीं जताया और फैसला आने से पहले कहती थीं कि अगर उन्हें सजा मिलती है तो वह जमानत का आग्रह नहीं करेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं उमा ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और भाजपा के सांगठनिक मामलों से खुद को अलग कर रखा है। आंदोलन से जुड़े लोगों में वह काफी कम उम्र 61 वर्ष की हैं और उग्र स्वभाव के लिए जानी जाती हैं।

 विनय कटियार : तेजतर्रार हिंदुत्व नेता कटियार बजरंग दल के मुखिया थे जो विहिप की युवा शाखा है। कल्याण सिंह और उमा भारती की तरह वह भाजपा के शीर्ष ओबीसी नेताओं में हैं जो हिंदुत्व की राजनीति से गहरे जुड़े हुए हैं। 1990 के दशक में पार्टी के अंदर उनका राजनीतिक ग्राफ काफी ऊंचा था और वह कई बार लोकसभा के लिए चुने गए। उन्हें उत्तरप्रदेश भाजपा का अध्यक्ष भी बनाया गया लेकिन राजनीतिक कद में वह कभी भी सिंह के आसपास भी नहीं आ सके। अपने कट्टर बयानों के लिए 66 वर्षीय नेता कई बार सुर्खियों में आते रहे हैं लेकिन वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व के पसंदीदा नेताओं में शुमार नहीं हैं। 

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