‘CM योगी एक घुसपैठिए....’, Akhilesh Yadav ने कर दिया वापस भेजने की मांग

Edited By Imran,Updated: 12 Oct, 2025 05:39 PM

akhilesh yadav said  send cm yogi back

Akhilesh Yadav on CM Yogi : समाजवादी पार्टी प्रमुख  अखिलेश यादव ( Akhilesh Yadav) ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना घुसपैठिए से करते हुए कहा कि वह उत्तराखंड से हैं और उन्हें राज्य वापस भेज दिया जाना चाहिए।

Akhilesh Yadav on CM Yogi : समाजवादी पार्टी प्रमुख  अखिलेश यादव ( Akhilesh Yadav) ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना घुसपैठिए से करते हुए कहा कि वह उत्तराखंड से हैं और उन्हें राज्य वापस भेज दिया जाना चाहिए।

यादव ने समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को लखनऊ के लोहिया पार्क में संवाददाताओं से कहा कि भाजपा के पास झूठे आंकड़े हैं। उन्होंने कहा, “अगर उनके आंकड़ों पर भरोसा किया जाए, तो आदमी भटक जाएगा।” यादव ने दावा किया, “जो लोग पलायन के आंकड़े दे रहे हैं... हमारे उत्तर प्रदेश में भी घुसपैठिए हैं। मुख्यमंत्री उत्तराखंड से हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें उत्तराखंड भेजा जाए। वह अकेले घुसपैठिए नहीं हैं, बल्कि विचारधारा के लिहाज से भी घुसपैठिए हैं। वह (आदित्यनाथ) भाजपा के सदस्य नहीं थे, बल्कि किसी और पार्टी के सदस्य थे। तो, इन घुसपैठियों को कब हटाया जाएगा।”


 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यह दावा किया था कि कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को वोट बैंक की तरह मानते हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती। इस लिहाज से यादव की टिप्पणी महत्वपूर्ण है। शाह ने यह टिप्पणी शुक्रवार को दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में 'घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और लोकतंत्र' विषय पर एक व्याख्यान देते हुए की। इस बीच, अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि वह जल्द ही इस मुद्दे पर बयान देंगे।

राम मनोहर लोहिया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि राम मनोहर लोहिया जीवन भर अन्याय और गैरजिम्मेदारी के खिलाफ लड़ते रहे। यादव ने कहा, “आज हम उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को जनता तक पहुंचाने, उन्हें जागरूक करने और उनके बताए रास्ते पर चलकर सभी के लिए आर्थिक और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं। जाति एक चिंता का विषय है। डॉ. लोहिया ने भी कहा था कि जाति को तोड़ना चाहिए और जाति को समाप्त करना चाहिए। बाबा साहेब (आंबेडकर) ने जाति के संबंध में कानून भी बनाया, लेकिन आज भी हमें जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।”

 

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