यूक्रेन से वापस आये छात्रों  ने सपा अध्यक्ष से की मुलाकात, अखिलेश बोले- 40 मोडिकल कॉलेज का दावा करने वाले युवाओं के भविष्य की रक्षा करें

Edited By Mamta Yadav,Updated: 21 Apr, 2022 07:52 PM

akhilesh said  protect the future of youth who claim 40 medical colleges

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को कहा कि युद्ध की विभीषिका से जूझ रहे यूक्रेन से आधी अधूरी पढ़ाई छोड़ कर आये मेडिकल छात्रों को सरकार यहॉ के मेडिकल कालेज में प्रैक्टिकल क्लासेज़ करने की अनुमति दे, बाक़ी पढ़ाई वे आनलाइन कर लेंगे।

इटावा: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को कहा कि युद्ध की विभीषिका से जूझ रहे यूक्रेन से आधी अधूरी पढ़ाई छोड़ कर आये मेडिकल छात्रों को सरकार यहॉ के मेडिकल कालेज में प्रैक्टिकल क्लासेज़ करने की अनुमति दे, बाक़ी पढ़ाई वे आनलाइन कर लेंगे।  

     


यूक्रेन से वापस आये मेडिकल छात्रों के एक समूह ने यादव से मुलाकात कर उनसे सरकार पर प्रैक्टिकल क्लासेज करने की अनुमति देने का दवाब बनाने की गुजारिश की। सभी से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि युद्धग्रस्त यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर आए हुए स्टूडेंट्स की इस मांग को सरकार तुरंत माने और युवाओं के भविष्य की रक्षा करें। छात्र छात्राओं ने यह मांग रखी कि उनकी पढ़ाई युद्ध ग्रस्त यूक्रेन में अवरुद्ध हो गई है जिसको पूरी कराने के लिए केंद्र सरकार पहल करें और इस पहल में सपा अध्यक्ष अपने स्तर पर भूमिका अदा करें। इससे पहले इन छात्र छात्राओं ने इटावा के जिलाधिकारी से भी मुलाकात करके अपनी बात रखी थी।      

मेडिकल छात्र छात्राओं ने पूर्व सीएम से मांग करते हुए कहा कि उनकी अधूरी पढ़ाई यूपी के किसी भी मेडिकल इंस्टिट्यूट में पूरी करवाई जाए, जिससे उनका भविष्य खराब होने से बच सके। छात्रों ने कहा कि उनकी यूक्रेन की यूनिवर्सिटी में बात हो रही है, लेकिन वहां के हालात ठीक नहीं है। खराब हालात के बीच वे लोग भी यूक्रेन जाना नहीं चाहते हैं। रूस और यूक्रेन की जंग में भारतीय छात्र-छात्राओं को उनका भविष्य अंधकार में दिखने लगा है। भले ही वह युद्ध क्षेत्र से निकलकर अपने घर सुरक्षित लौट आए है, लेकिन अब उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। यूक्रेन से लौटी छात्रा तेजस्विता यादव का कहना है कि सभी छात्र घर वापस तो आ गए लेकिन उनकी उम्मीदें अधूरी रह गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह देश में ही दोबारा पढ़ाई शुरू करते हैं तो उनका पैसा और साल दोनों ही बर्बाद होंगे इसलिए सरकार उनकी मांग पर सुनवाई करते हुए उनका भविष्य अंधकारमय होने से बचा ले।       

कोमल सिंह नाम की छात्रा का कहना है कि वब यूक्रेन में एमबीबीएस के पहले साल की छात्रा थी। वह बहुत ही उम्मीद से यूक्रेन पढ़ाई के लिए गई थीं, लेकिन वहां के हालात अचानक खराब हो गए। इस वजह से उन्हें अपनी जान बचाकर घर लौटना पड़ा। इस वजह से उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

 

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