Mayawati का 8 दिन में बड़ा यू-टर्न: आकाश आनंद और बहन दीपिका का पत्ता साफ, जानिए अब किसे सौंपी BSP की कमान?

Edited By Anil Kapoor,Updated: 20 Sep, 2026 01:08 PM

akash and deepika have no responsibility for the party mayawati

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने अंतिम फैसले और प्रतिज्ञा के 8 दिन बाद पारिवारिक मामलों को लेकर नया फैसला सुनाते हुए कहा कि अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और उनकी बेटी दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी...

Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने अंतिम फैसले और प्रतिज्ञा के 8 दिन बाद पारिवारिक मामलों को लेकर नया फैसला सुनाते हुए कहा कि अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और उनकी बेटी दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, परिवार में से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।

मायावती का यह फैसला 12 सितंबर को किए गए उनके उस पारिवारिक फैसले के 8 दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे (आकाश और ईशान) को पार्टी में छोटे या बड़े किसी भी पद पर रहते हुए राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि मेरा अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा है कि आनंद कुमार के खासकर किसी भी बेटे को बसपा में किसी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। मायावती ने यह भी कहा था कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

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बसपा प्रमुख ने रविवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में अपने फैसलों पर विस्तार से कहा कि अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि आकाश आनंद व इनकी बहन (दीपिका) को भी पार्टी की कोई जिम्मेदारी देने से एकदम दूर रखा जाए। अब इस फैसले में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब इन दोनों के स्थान पर आनंद कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा, जिसका आकाश आनंद व इनकी बहन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि आगे किसी भी तरह की पार्टी विरोधी गतिविधियां की जाएंगी।

मायावती ने चेतावनी देते हुए कहा कि फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गंभीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार में से किसी भी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शादी के बाद से आकाश आनंद का कदम-कदम पर ऐसा रवैया और गतिविधियां रही हैं, जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि अब आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं। उन्होंने कहा कि आकाश को अब पार्टी में वापस लेना बसपा के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात होगा और वह ऐसा कभी नहीं करेंगी।

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मायावती ने कहा कि अब ऐसे में आनंद कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूं या न करूं, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गंभीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि जहां तक आगे चलकर दीपिका आनंद की मदद लेने का सवाल है तो शादी होने के बाद यदि उनका मामला भी आकाश आनंद की तरह ही निकला तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति में आने के बाद अपने सभी नजदीकी रिश्तेदारों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा। बसपा प्रमुख ने कहा कि उनसे प्रेरित होकर उन्होंने भी उसी पदचिह्नों पर चलने का फैसला लिया और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित कर दिया। आनंद कुमार के बड़े बेटे आकाश आनंद और छोटे बेटे ईशान आनंद हैं, जबकि उनकी बेटी दीपिका आनंद वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

मायावती ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा के बाद 10 सितंबर को अपने भतीजे एवं सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया था। उन्होंने इससे पहले सिद्धार्थ को भी बसपा से बाहर कर दिया था। बसपा सूत्रों के अनुसार, आनंद कुमार पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। मायावती ने उन्हें 2017 में पहली बार इस पद पर नियुक्त किया था और उस समय यह शर्त रखी थी कि वह कभी सांसद, विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मायावती ने तब कहा था कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों में से किसी को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे।

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