Edited By Anil Kapoor,Updated: 10 Sep, 2026 09:41 AM

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर बड़ी शर्त रखी है। उन्होंने कहा है कि आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ यदि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते...
Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर बड़ी शर्त रखी है। उन्होंने कहा है कि आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ यदि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाएगा।
मायावती ने बीते बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर 6 बिंदुओं में पोस्ट कर कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव बहुत नजदीक हैं और ये तीनों राज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बहुजन समाज को शासित से शासक वर्ग बनाने के मिशन के लिए अति महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब बहुजन समाज, बीएसपी और मूवमेंट को बाबा साहेब के समय जैसा ही खासकर आरक्षण को लेकर कड़े चैलेंज का सामना है, तब बहुजन समाज के हर अंगों में खासकर दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जो इसमें बाधा उत्पन्न करे।
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बसपा प्रमुख ने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए भूले-भटके लोगों को सुधारा जा रहा है, जबकि मिशन में रुकावट बनने वालों पर अनुशासनात्मक कारर्वाई की जा रही है, जिसका चर्चित उदाहरण पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौका दिया लेकिन बीएसपी के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं महत्वाकांक्षा को ज्यादा महत्व दिया, जिसका खामियाजा इनके साथ-साथ इनके दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ा।
मायावती ने कहा कि इन लोगों ने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनंद एवं बीएसपी मूवमेंट की भी कभी सही से परवाह नहीं की, जबकि इसके लिए अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व समाज के सामने देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार एवं अपने दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को त्याग कर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में आकाश आनंद का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।