Edited By Anil Kapoor,Updated: 17 Sep, 2026 07:02 AM

बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे पूर्व विधायक के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा कस दिया है।...
Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे पूर्व विधायक के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा कस दिया है। ED ने मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का मामला दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी है।
मिली जानकारी के मुताबिक, मुकेश श्रीवास्तव पर यह गाज सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच रिपोर्ट के आधार पर गिरी है। विजिलेंस की जांच में आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं के कई पुख्ता सबूत मिले थे, जिसके बाद 10 जून को उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। अब विजिलेंस के उन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर ED इस बात की तहकीकात कर रही है कि अवैध रूप से जुटाई गई इस संपत्ति का मुख्य जरिया क्या था और इसमें किन-किन रास्तों से पैसों का लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) किया गया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पूर्व विधायक के भाई अजय श्रीवास्तव को लेकर हुआ है। बुधवार को विजिलेंस की अयोध्या सेक्टर की टीम ने लखनऊ और गोंडा स्थित अजय श्रीवास्तव के कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की।
जांच में सामने आया कि NRHM घोटाले के समय अजय श्रीवास्तव बलरामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में एक मामूली क्लर्क के पद पर तैनात था। लेकिन क्लर्क की नौकरी की आड़ में उसने पद का दुरुपयोग करते हुए अकूत काली संपत्ति खड़ी कर ली। छापेमारी के दौरान सतर्कता टीम को पूर्व क्लर्क के पास से करीब 28 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज और सुराग मिले हैं।
विजिलेंस के एक्शन के बाद अब ED की एंट्री से इस मामले में कई और बड़े चेहरों की सांसें अटक गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ED मुकेश श्रीवास्तव और उनके भाई को कस्टडी में लेकर पूछताछ कर सकती है, जिससे इस पूरे सिंडिकेट और बेनामी संपत्तियों के तार कहां-कहां जुड़े हैं, इसका खुलासा हो सकेगा।