Edited By Purnima Singh,Updated: 18 May, 2026 02:21 PM

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अमिताभ बाजपेयी ने स्वतंत्रता सेनानी एवं पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा स्थापित करने में कथित देरी के विरोध में रविवार को खून से पत्र लिखकर प्रदर्शन किया। आर्य नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमिताभ बाजपेयी मॉल...
कानपुर : समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अमिताभ बाजपेयी ने स्वतंत्रता सेनानी एवं पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा स्थापित करने में कथित देरी के विरोध में रविवार को खून से पत्र लिखकर प्रदर्शन किया। आर्य नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमिताभ बाजपेयी मॉल रोड स्थित स्मारक स्थल पर प्रतिमा के लिए बनाए गए चबूतरे के पास नंगे पैर और बनियान पहनकर पहुंचे। वहां उन्होंने खून से लिखे पत्र में सवाल किया, "मूर्ति कहां है? कब लगेगी?"
विद्यालय का पुनर्निर्माण होने तक नंगे पैर रहेंगे SP MLA
बाजपेयी ने बाद में घोषणा की कि वह यह पत्र सोमवार को डाक के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजेंगे। यह घटना उस प्रदर्शन के एक सप्ताह बाद हुई है, जब बाजपेयी ने कानपुर के परमट क्षेत्र में ध्वस्त किए गए एक प्राथमिक विद्यालय के पुनर्निर्माण में कथित देरी के विरोध में सार्वजनिक रूप से अपना कुर्ता और चप्पल उतार दी थी। सपा विधायक ने संकल्प लिया है कि विद्यालय का पुनर्निर्माण होने तक वह नंगे पैर और बिना कुर्ते के रहेंगे। उनका आरोप है कि पुराने भवन को गिराए जाने के बाद भूमि माफिया विद्यालय की जमीन पर नजर गड़ाए हुए हैं।
'मैंने खून से लिखा पत्र ताकि इसे पहचाना जाए'
कानपुर के आठ विधायकों में से एक अमिताभ बाजपेयी ने प्रशासन पर मामले में निष्क्रियता का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर वह पहले भी कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाजपेयी ने कहा, "इस बार मैंने खून से पत्र लिखा है, ताकि शायद इस रंग को पहचाना जाए।" उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका संघर्ष अब परिणाम देगा। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि "हाथ में चप्पल लेकर चलने और सार्वजनिक रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के लिए चर्चित एक व्यक्ति" ने प्रतिमा अपने कब्जे में रखी हुई है। उन्होंने इस देरी को कानपुर की विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान बताया।
'यह कानपुर की पहचान, इतिहास और स्वाभिमान का प्रश्न'
सपा विधायक ने कहा, "यह सिर्फ एक प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि कानपुर की पहचान, इतिहास और स्वाभिमान का प्रश्न है।" उन्होंने प्रतिमा को तत्काल स्थापित करने और देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने दावा किया कि यह मामला पहले जिलाधिकारी के समक्ष भी उठाया गया था और तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (नगर) राजेश कुमार द्वारा निरीक्षण भी किया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाजपेयी ने मॉल रोड मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर "गणेश शंकर विद्यार्थी स्टेशन" करने की भी मांग की और चेतावनी दी कि यदि मामला लंबित रहा तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।