शिक्षा पर CM योगी का बड़ा बयान: ईरान-अमेरिका तनाव का जिक्र कर बोले—'एक भी बच्चा अनपढ़ रहा, तो भुगतना पड़ेगा अंजाम'

Edited By Anil Kapoor,Updated: 18 May, 2026 10:38 AM

it is responsibility of society and country to provide education to every child

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि समाज का एक भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो उसके दुष्परिणाम पूरे देश को लंबे समय तक भुगतने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री ने 24,717...

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि समाज का एक भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो उसके दुष्परिणाम पूरे देश को लंबे समय तक भुगतने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री ने 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह और चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "विवाद ईरान और अमेरिका के बीच है, लेकिन लगभग 200 देश इसके प्रभावों को झेल रहे हैं और दुनिया भर के करीब 800 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे हैं। समाज में भी यही स्थिति होती है। यदि कोई एक व्यक्ति शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो पूरे समाज और देश को लंबे समय तक इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

बच्चों को स्कूल भेजना सामूहिक जिम्मेदारी, UP में 3% रह गई ड्रॉपआउट दर
आदित्यनाथ ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल भेजना समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर हमेशा संयम और अनुशासन का परिचय दिया है तथा कभी भी हिंसा या दबाव की राजनीति का सहारा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि राज्य में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय कमी आई है। आदित्यनाथ ने कहा कि पहले राज्य में ड्रॉपआउट दर लगभग 17 से 18 प्रतिशत थी। यानी हर 100 बच्चों में से 17 या 18 बच्चे समय से पहले स्कूल छोड़ देते थे। आज इसे घटाकर लगभग तीन प्रतिशत कर दिया गया है और हमारा लक्ष्य इसे शून्य तक पहुंचाना है।

2017 से पहले खराब थी शिक्षा व्यवस्था, हमारी सरकार ने नहीं खत्म की अनुदेशकों की सेवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के लिए सभी तक शिक्षा पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और कई स्कूल बंद होने की कगार पर थे। आदित्यनाथ ने कहा कि जब राजनीतिक नेतृत्व भ्रष्ट और दिशाहीन होता है, तब असफलताओं के लिए शिक्षकों, अनुदेशकों और कर्मचारियों को दोषी ठहराया जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में ऐसे विद्यालयों से अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने के प्रस्ताव लंबित थे, जहां छात्र संख्या 100 से कम थी, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसा कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि पहले न तो कोई स्पष्ट नीति थी और न ही ईमानदार नीयत। ऐसे में बुनियादी शिक्षा में सुधार संभव नहीं था।

अनुदेशकों का मानदेय बढ़कर हुआ 17,000 रुपए, मिलेगा 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपए प्रतिमाह करने का फैसला किया है। साथ ही शिक्षकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और उनके परिवार के सदस्यों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए पोर्टल तैयार किया जा चुका है और अगले सप्ताह स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाएंगे।

शिक्षक-अनुदेशक हैं शिक्षा व्यवस्था की नींव, मानदेय और कार्य में हो गरिमा
आदित्यनाथ ने बताया कि 2011-12 में 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 41,307 अनुदेशकों की नियुक्ति 7,000 रुपए मासिक मानदेय पर की गई थी। वर्तमान में उनकी संख्या घटकर लगभग 24,296 रह गई है। शिक्षकों और अनुदेशकों को शिक्षा व्यवस्था की नींव बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नींव दिखाई नहीं देती, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि नींव मजबूत नहीं होगी तो मजबूत इमारत खड़ी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशकों और शिक्षा मित्रों का मानदेय सम्मानजनक होना चाहिए और उनके कार्य में भी गरिमा होनी चाहिए।

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