Mahashivratri: माघ मेला का अंतिम स्नान पर्व आज, 6 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी

Edited By Pooja Gill,Updated: 08 Mar, 2024 01:10 PM

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प्रयागराज: माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व आज यानी महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को करीब छह लाख लोगों ने गंगा और पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। माघ मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि आज सुबह से स्नानार्थियों का संगम क्षेत्र में आना जारी है...

प्रयागराज: माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व आज यानी महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को करीब छह लाख लोगों ने गंगा और पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। माघ मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि आज सुबह से स्नानार्थियों का संगम क्षेत्र में आना जारी है और सुबह 10 बजे तक करीब छह लाख लोगों ने गंगा और संगम में स्नान किया। नगर के विभिन्न शिव मंदिरों में भारी संख्या में लोग शिवलिंग पर माला फूल, दूध आदि चढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्नानार्थियों की सुविधा के लिए घाटों की लंबाई 6,800 फुट से बढ़ाकर 8,000 फुट कर दी गई है और कुल 12 घाट बनाए गए हैं एवं सभी घाटों पर पर्याप्त संख्या में वस्त्र बदलने की सुविधा स्थापित की गई है।

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मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भोलेनाथ का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है विशेषकर बेलपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर आदि अर्पित किया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ अपनी बारात में उन सभी को आमंत्रित करते हैं, जिनकी समाज उपेक्षा करता है। इसीलिए भोलेनाथ को पतित पावन कहा जाता है।

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सुरक्षा के किए पुख्ता इंतजाम
पुलिस उप-महानिरीक्षक (माघ मेला) डॉ. राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि नगर के मनकामेश्वर मंदिर, सोमेश्वर महादेव मंदिर और नागवासुकी मंदिर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गयी है।

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महाशिवरात्रि का पर्व आज यानी 8 मार्च को मनाया जा रहा है। यह पर्व हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन का इंतजार सभी शिव भक्त बड़ी बेसब्री से कर रहे थे और आज यह पर्व आ गया है। शिव पुराण के अनुसार आज के दिन मां पार्वती और भगवान शिव विवाह बंधन में बंधे थे। महाशिवरात्रि के पावन अवसर भगवान शिव को प्रसन्न एवं संतुष्ट करना सब पापों को नाश करने वाला तथा परम गुणकारी है, जो भी जीव उनके चरणों में प्रणाम करता है भगवान शिव अपने भक्तजनों को मृत्यु आदि विकारों से रहित कर देते हैं। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विधान है।
 

 

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