Edited By Anil Kapoor,Updated: 11 Sep, 2026 11:35 AM

उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने जाली नोट छापने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छापेमारी कर 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 2 लाख 4 हजार 650 रुपए के नकली नोट बरामद हुए हैं। हैरान करने वाली...
Kanpur News: उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने जाली नोट छापने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छापेमारी कर 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 2 लाख 4 हजार 650 रुपए के नकली नोट बरामद हुए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस हाईटेक नेटवर्क का मास्टरमाइंड महज 5वीं पास है, जो किराए के कमरे में प्रिंटर और खास पेपर की मदद से 50, 100 और 500 रुपए के जाली नोट तैयार कर रहा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 100-100 रुपए के 1,991 नोट, 50 रुपए के 71 नोट और 500 रुपए के 4 नकली नोट जब्त किए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई रेल बाजार थाना पुलिस ने सटीक मुखबिरी के आधार पर की है। गिरोह के सदस्य रेल बाजार इलाके में रामलीला मैदान के पास एक किराए का कमरा लेकर जाली नोट छापने की फैक्ट्री चला रहे थे। पुलिस ने जब वहां अचानक रेड मारी, तो मौके से तीनों आरोपियों को रंगे हाथों धर दबोचा। कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को जाली नोटों के अलावा एक प्रिंटर, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला खास कागज, इंक कंटेनर, कैंची, पेपर कटर और तराजू जैसी सामग्री बरामद हुई है।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी असली नोटों के बदले 3 गुना जाली नोट देने का धंधा भी करते थे। यह गिरोह भीड़भाड़ वाले बाजारों, छोटी दुकानों और खासकर कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन व आसपास के स्टेशनों पर इन नोटों को खपाता था। स्टेशन पर यात्रियों की आपाधापी और दुकानदारों की जल्दबाजी का फायदा उठाकर ये आरोपी जाली करेंसी आसानी से चला देते थे।
पकड़े गए तीनों आरोपी पुराने हिस्ट्रीशीटर हैं और उनका लंबा आपराधिक रिकॉर्ड है:-
- शेर सिंह (52 वर्ष): गिरोह का मास्टरमाइंड, जो उन्नाव के बांगरमऊ का रहने वाला है। यह केवल 5वीं पास है लेकिन प्रिंटर से हुबहू नकली नोट छापने में माहिर है। इस पर 4 मुकदमे दर्ज हैं।
- रोशन अली (24 वर्ष): मूल निवासी बलरामपुर। इस पर रंगदारी और धोखाधड़ी समेत 7 केस दर्ज हैं।
- सोमनाथ उर्फ सोमिल गुप्ता (36 वर्ष): मूल निवासी जालौन। इस पर भी 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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बताया जा रहा है कि कानपुर पुलिस अब इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि यह गिरोह कब से नकली नोट छापने का काम कर रहा था और अब तक बाजार में कितने लाख रुपए की जाली करेंसी खपाई जा चुकी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट में इनके साथ और कौन-कौन से मददगार या सप्लायर जुड़े हुए हैं।