‘शंकराचार्य का अपमान, नही सहेगा हिंदुस्तान...', स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सपा ने लगाए पोस्टर

Edited By Pooja Gill,Updated: 22 Jan, 2026 03:02 PM

india will not tolerate the insult of shankaracharya

लखनऊ: प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने को लेकर घटित घटना के विरोध में समाजवादी पार्टी (सपा) मैदान में उतर आई है...

लखनऊ: प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने को लेकर घटित घटना के विरोध में समाजवादी पार्टी (सपा) मैदान में उतर आई है। पार्टी कार्यालय के बाहर अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में समाजवादी छात्रसभा के पूर्व प्रदेश सचिव आशुतोष सिंह ने पोस्टर लगाया है। पोस्टर पर ‘शंकराचार्य का अपमान, नही सहेगा हिंदुस्तान' लिख कर समर्थन दिया है।       

भाजपा पर लगातार हमलावर हो रही सपा 
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। भाजपा को घेरने के लिए अखिलेश यादव कोई मौका नही चूक रहे हैं। अभी दो दिन पहले ही फोन पर शंकराचार्य से बात कर उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। इसी क्रम में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने शंकराचार्य से प्रयागराज माघ मेले में मुलाकात की थी। 

अखिलेश यादव ने साधा निशाना 
एक दिन पूर्व अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा था कि यदि कोई अधिकारी शंकराचार्य से परिचय और प्रमाण-पत्र मांग रहा है, तो सनातन धर्म का इससे बड़ा अपमान कोई और नहीं हो सकता है। भाजपा सरकार ने सनातन धर्म, शंकराचार्य, साधु-संतों, माघ मेला और देश का अपमान किया है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार ने शंकराचार्य और साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार किया है। भाजपा को अधिकारियों के माध्यम से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश का संविधान, कानून, भाईचारा और परम्परा तोड़ रही है। इस सरकार में किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हो रहा है।       

क्या है मामला 
गौरतलब है कि बीते दिनों माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी परंपरागत पालकी यात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी पालकी यात्रा को बीच रास्ते में रोक दिया और उन्हें जिस स्थान पर उतारा गया, वहीं छोड़ दिया गया। इसी के विरोध में शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए। वहीं शंकराचार्य ने पुलिस पर मारपीट का भी आरोप लगाया है। 
 

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