योगी के अयोध्या से चुनावी समर में उतरने से पूर्वांचल में हो सकता है BJP को बड़ा फायदा

Edited By Ramkesh, Updated: 14 Jan, 2022 07:27 PM

bjp can contest yogi from ayodhya

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। मगर राजनीति के जानकार मानते हैं कि योगी यदि अयोध्या से चुनाव के रणक्षेत्र में उतरते हैं तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में इसका व्यापक असर, खासकर अवध और...

बस्ती: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। मगर राजनीति के जानकार मानते हैं कि योगी यदि अयोध्या से चुनाव के रणक्षेत्र में उतरते हैं तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में इसका व्यापक असर, खासकर अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में पड़ना तय है। अवध क्षेत्र में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार कहा कि वह बड़ी बेसब्री से योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनो ‘अयोध्या' शाश्वत शब्द बन गया है। पिछले दो सालों से प्रदेश की राजनीति अयोध्या के ईद गिर्द घूमती नजर आयी है जिसका श्रेय योगी आदित्यनाथ को जाता है।

 राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर योगी अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं तो इसका असर अवध क्षेत्र और पूर्वांचल के जिलों बस्ती, संतकबीर नगर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, देवरिया और महाराजगंज मे पड़ना तय है। यह बिल्कुल वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना संसदीय क्षेत्र वाराणसी को चुना था और भाजपा के पक्ष में जिसका व्यापक असर पूर्वांचल में पड़ा है।  उनका कहना है कि जाति के सम्मान और उपेक्षा का हवाला देकर दलबदलू मंत्री एवं विधायक भले ही भाजपा से किनारा कर लें, मगर इसका जवाब देने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनावी समर में उतरना होगा। जानकार मानते है कि इस फैसले से अगड़ी और पिछड़ी जाति के बजाय धर्म की राजनीति को लाभ मिलेगा जो भाजपा के पक्ष में जायेगा।  

योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट से पूर्वांचल में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का उत्साह चरम पर है। भाजपा से अयोध्या के मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता भी कह चुके हैं कि अगर योगी यहां से चुनाव लड़ते हैं तो उनके लिए वह अपनी सीट छोड़ देंगे।  अयोध्या विधानसभा सीट भाजपा के लिए नाक का सवाल है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा किया था। 1991 से पहले तक इस सीट को कभी जनता दल तो कभी कांग्रेस ने हासिल किया लेकिन राम मंदिर की लहर ने इस सीट को भाजपा के नाम कर दिया। पहली बार भाजपा से 1991 में पार्टी उम्मीदवार लल्लू सिंह ने यहां भगवा लहराया। 2012 में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी और सपा ने इसने अपने नाम कर लिया लेकिन फिर 2017 में योगी-मोदी लहर में वेद प्रकाश गुप्ता ने यहां फिर से भाजपा का परचम लहरा दिया था।   पिछले चुनाव में बस्ती मंडल की 13 विधानसभा सीटों में से भाजपा के पास 12 सीटें थी। एक सीट अपना दल के पास थी। अभी तक अपना दल से भाजपा के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है इसलिए सपा खेमे की नजर अपना दल की ओर भी लगी हुई है।  

विधानसभा चुनाव के छठे चरण में 03 मार्च को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर तथा बस्ती मंडल के सातों जिलों के डेढ़ करोड़ से अधिक मतदाता अपने अपने जनप्रतिनिधियों को चुनेंगे। गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिध्दार्थनगर एवं संतकबीर नगर जिले के एक करोड़ 54 लाख 51 हजार 251 मतदाता 41 विधानसभा सीटों के लिये अपना जनप्रतिनिधि चुनेंगे।   इन सात जिलों में तीन मार्च को मतदान होगा। इसके लिये चार फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी जो 11 फरवरी तक चलेगी। 14 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच व नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 फरवरी है। गोरखपुर और बस्ती मंडल की 41 विधान सभा सीटों पर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गयी हैं। बसपा ने अभी तक यहां कोई जनसभा नहीं की है जबकि आम आदमी पार्टी, सुहेलदेव समाज पार्टी और निषाद पार्टी पहले से ही दोनों मंडलों में अपने वोट बैंक को मजबूत करने में लगी हैं। 

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