Edited By Ramkesh,Updated: 07 Apr, 2026 06:05 PM

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और ब्रह्मचारी आशुतोष महाराज के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच एक संत कार्यक्रम में आशुतोष महाराज ने विवादित बयान दिया है।
प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और ब्रह्मचारी आशुतोष महाराज के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच एक संत कार्यक्रम में आशुतोष महाराज ने विवादित बयान दिया है।
उन्होंने दावा किया है जिस व्यक्ति को शंकराचार्य बताया जा रहा है, वह नकली है उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति का वैवाहिक जीवन रहा है और उसकी संतान भी है, जो शंकराचार्य परम्परा की मर्यादा के विपरीत है। उनका कहना है कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे सनातन धर्म और उसकी परम्पराओं की गरिमा से जुड़ा हुआ है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को शंकराचार्य बताया जा रहा है, उसके जीवन से जुड़े तथ्य पारंपरिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति का पारिवारिक जीवन रहा है, जो शंकराचार्य परंपरा की स्थापित मर्यादाओं के विपरीत माना जाता है।
संत समाज में तेज हुई चर्चा
इस बयान के बाद संत समाज के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा और बहस का दौर तेज हो गया है। विभिन्न साधु-संत और धार्मिक संगठनों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।
जांच की उठी मांग
आशुतोष महाराज ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शंकराचार्य की परंपरा आदि शंकराचार्य से जुड़ी हुई है, जिसकी गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
समाज से एकजुट होने की अपील
उन्होंने इस मुद्दे को व्यापक बताते हुए संत समाज और आम लोगों से एकजुट होकर धर्म और परंपराओं की रक्षा के लिए आगे आने की अपील भी की। साथ ही ‘सनातन न्याय यात्रा’ में अधिक भागीदारी का आह्वान किया।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन या संबंधित संगठनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा संत समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। यह मामला अब धार्मिक परंपराओं, सामाजिक मान्यताओं और तथ्यों की सत्यता को लेकर एक बड़ी बहस का रूप लेता जा रहा है।