Edited By Ramkesh,Updated: 02 Apr, 2026 07:39 PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को आकाशवाणी के लखनऊ केंद्र के 89वें स्थापना दिवस पर समाज को जोड़ने, भाषाई विविधता को बनाए रखने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में आकाशवाणी की ऐतिहासिक भूमिका की तारीफ की।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को आकाशवाणी के लखनऊ केंद्र के 89वें स्थापना दिवस पर समाज को जोड़ने, भाषाई विविधता को बनाए रखने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में आकाशवाणी की ऐतिहासिक भूमिका की तारीफ की।
मुख्यमंत्री ने आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक समारोह में अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि स्मार्टफोन, टेलीविजन और बड़े पैमाने पर टेलीफोन कनेक्टिविटी से रहित उस युग में रेडियो जानकारी और प्रेरणा का मुख्य स्रोत था। उन्होंने कहा, "हमने जो पहली आवाज़ सुनी वह आकाशवाणी की थी। इसकी सुबह की सिग्नेचर ट्यून और प्रोग्राम हर घर को जोड़ते थे और समाचार प्रसार में भाषाई शुद्धता और विश्वसनीयता दोनों दिखाते थे।
आदित्यनाथ ने कहा, "मैंने बचपन से देखा कि समाज को जोड़ने का माध्यम आकाशवाणी बनी, भारत की आस्था को सम्मान देने वाला माध्यम भी आकाशवाणी थी। जब बड़े हुए तो देश-दुनिया में क्या चल रहा है, उसकी जानकारी भी आकाशवाणी से ही मिलती थी। सबसे बड़ी बात उसमे भाषा की शुद्धता भी थी और सत्यता भी।" मुख्यमंत्री ने भारत की विभिन्न भाषाओं और बोलियां को आगे बढ़ाने में आकाशवाणी की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी की उपभाषाओं और बोलियों, जैसे भोजपुरी, अवधी, गढ़वाली और कुमाऊनी को कैसे स्थानीय लोगों को जोड़ने का माध्यम बनाएं और उसको कैसे लोकप्रिय बनाए जाएं, यह भी आकाशवाणी के माध्यम से ही सुनने को देखने को अवसर प्राप्त होता था।
उन्होंने कहा कि यह केवल मनोरंजन नहीं था, ज्ञानवर्धन भी था, आस्था का सम्मान भी था और साथ-साथ स्थानीय लोक भाषा, लोक कला के लिए मंच का एक सशक्त माध्यम भी था। आदित्यनाथ ने कहा कि साल 1938 में जब यह देश आजाद नहीं हुआ था,तब पहली धुन वंदे मातरम की आकाशवाणी लखनऊ से प्रसारित हुई थी।