'निजी परिसर में नमाज और धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगा सकते', संभल विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

Edited By Purnima Singh,Updated: 19 Mar, 2026 03:45 PM

no ban on religious events on private premises says allahabad high court

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर से कहा है कि एक व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजन के संबंध में कोई रोक नहीं लगाई जा सकती, भले ही वह व्यक्ति किसी भी धर्म में आस्था रखता हो। इस मामले में, उच्च न्यायालय ने पूर्व में संभल के...

प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर से कहा है कि एक व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजन के संबंध में कोई रोक नहीं लगाई जा सकती, भले ही वह व्यक्ति किसी भी धर्म में आस्था रखता हो। इस मामले में, उच्च न्यायालय ने पूर्व में संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को कहा था कि यदि वे कानून का राज स्थापित नहीं कर सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना स्थानांतरण करवा लेना चाहिए। 

इन अधिकारियों ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए संभल में एक परिसर में नमाजियों की संख्या सीमित कर दी थी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने उस ढांचे की फोटो देखने के बाद कहा कि वह ढांचा आज की तिथि तक मस्जिद नहीं है। हालांकि अदालत ने कहा कि उस स्थान का उपयोग पूर्व में नमाज अदा करने के उद्देश्य से किया गया है। इसलिए उस स्थान पर नमाज अदा करने पर कोई रोक नहीं होगी। पीठ ने 16 मार्च को संभल निवासी मुनाजिर खान द्वारा दायर याचिका निस्तारित कर दी। खान ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने उनके परिसर में रमजान के महीने में केवल 20 लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति दी, जबकि बड़ी संख्या में नमाजी वहां आ सकते थे।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 27 फरवरी को संभल के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को कहा था कि यदि वे कानून का राज स्थापित नहीं कर सकते तो वे इस्तीफा दे दें या अपना स्थानांतरण करा लें। अदालत ने कहा, ''1.4 अरब की आबादी वाले इस देश की खूबसूरती इसके लचीलापन और ताकत में निहित है जो कि इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता से उत्पन्न होती है। इस धरती पर दूसरा कोई देश नहीं है जहां सदियों से हर बड़े धर्म, संस्कृति और भाषाई विविधता सह-अस्तित्व में रही है।''
 

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