Edited By Ramkesh,Updated: 29 Jan, 2026 04:33 PM

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों, शंकराचार्य विवाद और विपक्षी दलों की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों का जिस तरह से विरोध हो रहा है, उसे देखते...
जौनपुर: उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों, शंकराचार्य विवाद और विपक्षी दलों की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों का जिस तरह से विरोध हो रहा है, उसे देखते हुए अब मामला अदालत तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान ले लिया है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में इस पर एक अच्छा और संतुलित फैसला सुनने को मिलेगा।
राज्यमंत्री ने कहा कि यूजीसी एक संवैधानिक संस्था है और उसके नियम-कायदों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और जो भी फैसला आएगा, वह देश और शिक्षा व्यवस्था के हित में होगा। शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर बोलते हुए दयाशंकर मिश्र ने कहा कि शंकराचार्य को कुंभ में स्नान करके ही जाना चाहिए था। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति को राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, संतों और धर्मगुरुओं की भूमिका समाज को दिशा देने की होती है, न कि राजनीतिक विवादों में उलझने की।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। राज्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव और ममता बनर्जी को हर मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता हर विषय को राजनीतिक चश्मे से देखने लगते हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा होती है।
दयाशंकर मिश्र ने कहा कि देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक राजनीति की जरूरत है। हर मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय जनहित, शिक्षा और विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में न्यायालय और सरकार के प्रयासों से सभी विवादों का समाधान निकलेगा और जनता को सच्चाई से अवगत कराया जाएगा।