3 अज्ञात लोग, लाखों का ऑफर और... स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाने की बड़ी साजिश, अब HC पहुंचा मामला

Edited By Anil Kapoor,Updated: 12 Jul, 2026 02:03 PM

allahabad hc seeks response from up government on petition against ashutosh brah

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस रिट याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि आशुतोष ब्रह्मचारी के दबाव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता को धमकाया....

Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस रिट याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि आशुतोष ब्रह्मचारी के दबाव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता को धमकाया जा रहा है। सरस्वती के खिलाफ पहले शिकायत दर्ज कराने वाले ब्रह्मचारी ने जून में कहा था कि उन्होंने मथुरा स्थित देवा आश्रम के महंत रामचंद्र दास के दबाव में झूठा मुकदमा दायर कराया था। उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले रामाशंकर दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने दबाव के आगे झुकने से इनकार किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। याचिकाकर्ता ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए इस संबंध में उचित निर्देश जारी करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया है।

UP पुलिस को नोटिस और 16 जुलाई को अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने ब्रह्मचारी को भी रिट याचिका में प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने रजिस्ट्राट (अनुपालन) को यह आदेश बरेली जोन के पुलिस महानिरीक्षक, शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक और शाहजहांपुर के सदर बाजार थाने के प्रभारी को बरेली तथा शाहजहांपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से भेजने का निर्देश भी दिया। अदालत ने 9 जुलाई के अपने आदेश में मामले को अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। ब्रह्मचारी मथुरा के शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित मामले के वादियों में भी शामिल हैं।

लाखों के ऑफर और जान की धमकी का गंभीर आरोप
ब्रह्मचारी की अर्जी पर कार्रवाई करते हुए प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) अदालत ने पुलिस को 56 वर्षीय सरस्वती और अन्य लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। मौजूदा रिट याचिका में दीक्षित ने आरोप लगाया कि 18 फरवरी 2026 को 3 अज्ञात लोगों ने उनसे सरस्वती को झूठे मामले में फंसाने को कहा और इसके बदले उन्हें पैसे देने की पेशकश की। याचिकाकर्ता ने कहा कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उन लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

सुरक्षाकर्मियों पर बयान बदलने का आरोप, याचिकाकर्ता पहुंचे कोर्ट
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने पुलिस प्रशासन से संपर्क किया, जिसके बाद सुरक्षा के लिए कुछ पुलिसकर्मियों को उनके आवास पर तैनात किया गया। हालांकि, इन पुलिसकर्मियों ने उन पर अपना बयान बदलने के लिए कथित तौर पर दबाव डालने की कोशिश की। दीक्षित के अनुसार, इसके बाद उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों से दोबारा शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। याचिका में कहा गया है कि ऐसे में उनके पास उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। दीक्षित ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग की है।

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