'नेताओं को हटाओ, संतों को सौंपो कमान!' चंपत राय के बयान पर भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, SIT जांच को बताया ढोंग

Edited By Anil Kapoor,Updated: 09 Jul, 2026 08:03 AM

avimukteshwarananda raises questions on sit probe into ram temple case

ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SITटी) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि मंदिर परियोजना शुरू होने के बाद से कई चरण में अनियमितताएं ....

Lucknow News: ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SITटी) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि मंदिर परियोजना शुरू होने के बाद से कई चरण में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने मंदिर प्रबंधन में पूरी तरह से बदलाव की मांग की। अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी राज्यव्यापी गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा के तहत लखनऊ पहुंचने के बाद एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि मामला दान पेटी से चोरी की एक घटना तक सीमित नहीं है।

RSS और सरकार पर तीखा हमला
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब से मंदिर में दान दिया जाना शुरू हुआ है तब से अनियमितताएं हो रही हैं। जमीन की खरीद के दौरान, निर्माण के दौरान और अब दान के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर का प्रशासन धार्मिक नेताओं को सौंपा जाना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि वह भगवान राम को भगवान नहीं मानता। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे विचार रखने वाले मंदिर का प्रबंधन कैसे कर सकते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों, पुजारियों और वादियों को दरकिनार करके मंदिर प्रशासन में अपने पदाधिकारियों की नियुक्ति की, जो इसे एक कार्यालय की तरह संभालते हैं, न कि मंदिर की तरह।

गोपनीयता और सरकारी दखल पर उठाए मुद्दे
अविमुक्तेश्वरानंद ने चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच पर टिप्पणी करते हुए इसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच से क्या हासिल होगा? सरकार ने ट्रस्ट और एसआईटी दोनों का गठन किया है। यदि एक ही सरकार ने दोनों को बनाया है, तो उन्हें स्वतंत्र कैसे माना जा सकता है? अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल किया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ट्रस्ट तक कैसे पहुंची। उन्होंने कहा कि यह एक गोपनीय दस्तावेज था और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था।

'बरामदगी के बाद भी मामले को दबाया'
ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के हालिया बयान का हवाला देते हुए कि वह जांच पूरी होने के बाद जवाब देंगे, अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि राय ने पहले ही मामले में बरामदगी हो जाने के बावजूद प्रकरण को खारिज कर दिया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि नकदी 5 जून को बरामद की गई थी और 7 जून को उन्होंने (राय) कहा था कि यह एक नियमित ऑडिट था और इसमें कुछ भी नया नहीं था। अगर किसी ने पहले ही ऐसे बयान दिए हैं, तो वह जांच के बाद क्या कहेंगे? वह पहले ही झूठी बात कह चुके हैं और यह साबित हो चुका है।

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