Edited By Mamta Yadav,Updated: 03 Apr, 2025 02:52 AM

यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच सीमा विवाद का जख्म करीब 56 साल पुराना है जो 1968 से चला आ रहा है। इस जख्म का दर्द सबसे ज्यादा बागपत के किसान झेल रहे हैं। मगर आज तक इस पर किसी ने मरहम नहीं लगाया। यमुना खादर की जमीन पर कब्जे को लेकर लगातार दोनों...
Baghpat News, (विवेक कौशिक): यूपी और हरियाणा के किसानों के बीच सीमा विवाद का जख्म करीब 56 साल पुराना है जो 1968 से चला आ रहा है। इस जख्म का दर्द सबसे ज्यादा बागपत के किसान झेल रहे हैं। मगर आज तक इस पर किसी ने मरहम नहीं लगाया। यमुना खादर की जमीन पर कब्जे को लेकर लगातार दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच संघर्ष होता रहता है तो कई किसानों की जान भी जा चुकी है। मुकदमे बाजी भी चल रही है। चुनाव में समस्या के समाधान का आश्वासन भी नेताओं से मिलता है। मगर समस्या आज भी ज्यो की त्यों खड़ी है। जिसके चलते किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए दिन रात हाथों में डंडे लेकर यमुना खादर में पहरा लगा रहे हैं। लेकिन जिला प्रशासन हर बार मामले की जाँच कराकर दोनों प्रदेशों के किसानों की आपस में बात कराने की बात कहकर इस मुद्दे को भूल भूलैया में डाल देता है।

बागपत के 27 गांवों की 17 हजार बीघा जमीन विवाद में फंसी
यूपी व हरियाणा के किसानों की करीब 17730 बीघा जमीन यमुना खादर में सीमा विवाद में फंसी है। फसल की बुआई व कटाई के समय दोनों राज्यों के किसानों के बीच विवाद होता है। जिले के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, फैजपुर निनाना, लुहारी, कोताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव सीमा विवाद से प्रभावित है। इनका हरियाणा के सोनीपत के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर आदि गांवों से विवाद चल रहा है।

इस कड़ी मे अब छपरौली क्षेत्र के नांगल गांव का भी नाम जुड़ गया हैं। नागल के किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए दिन रात अपने खेतो पर पहरा देने को मजबूर हैं। नांगल के किसानों का कहना हैं कि हरियाणा की तरफ से किसान आते हैं और उत्तर प्रदेश के किसानों की पकी पकाई फसल को लूट कर ले जाते हैं और बाकि फसलों को बर्बाद कर देते हैं। इसी कारण नांगल के किसान अब अपनी फसलों को बचाने के लिए दिन-रात खेतों में पहरा दें रहें है।

किसानों का आरोप हैं कि हरियाणा के किसानों के साथ वहां का प्रसाशन आता हैं जबकि बागपत का प्रसाशन हमारी कोई मदद नहीं करता। नांगल के किसानों का कहना हैं यदि इस बार भी हरियाणा ने हमारी फसलों को लूट लिया तो उनके भूखो मरने की नौबत आ जाएगी ऐसे में उन्हें खुदखुशी जैसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।