मदर्स डे पर झकझोर देगी इस मां की कहानी... आलीशान घर, फिर भी वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर

Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 12 May, 2024 04:38 PM

mother s day son is a millionaire yet mother is forced to live in an

आज मदर्स डे मनाया जा रहा है। ये दिन हर उस महिला को समर्पित है, लोग अपनी माताओं के लिए तरह-तरह के पोस्ट डाल रहे...

आगरा: आज मदर्स डे मनाया जा रहा है। ये दिन हर एक मां को समर्पित है, लोग अपनी माताओं के लिए तरह-तरह के पोस्ट डाल रहे हैं। अपनी मां को अपनी दुनियां बता रहे हैं, लेकिन इस बीच एक बूढी मां करोड़ों की मालकिन होने के बावजूद भी दर-दर की ठोकरें खा रही है। इस मदर्स डे पर 88 साल की विद्या देवी की कहानी आपके रूबरू कराएंगे, जो किसी का भी कलेजा चीर कर रख देगी।

दरअसल, 88 साल की विद्या देवी आगरा कमला नगर की रहने वाली है। चार बेटे हैं और चारों के चारों बेटे करोड़पति हैं। दो बेटों की तो फैक्ट्री चल रही है। सबके पास आलीशान बंगला-कोठी, नौकर-चाकर और लग्ज़री गाड़ी है, लेकिन घर के कोने में बूढ़ी मां के लिए जगह नहीं है। विद्या देवी पिछले 2 सालों से आगरा के रामलाल वृद्धा आश्रम में रह रही है। अब तो उम्मीद भी पथरा गयी है कि बेटे घर वापस लेने आएंगे। आंखों में आंसू भरकर विधा देवी उस पलों को याद करती है, जब वह अपने बेटों के साथ ठाट बाट से रहती थी। बुजुर्ग विद्या देवी आगरा के नामचीन आंखों के अस्पताल के संस्थापक रहे गोपीचंद अग्रवाल की पत्नी है। गोपीचंद की गिनती शहर के अरबपतियों में होती थी। चारों बेटों को अपने पैरों पर खड़ा किया और सभी की शादी की। 14 साल पहले गोपीचंद की मौत हो गई और धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदलने लगी। बेटों ने प्रॉपर्टी का बंटवारा कर लिया, लेकिन बूढ़ी मां को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया।

पिछले 2 सालों से किसी ने कोई सुध नहीं ली- विद्या देवी
विद्या देवी कहती हैं कि भगवान ऐसा किसी के साथ ना करे। भरा पूरा परिवार होने के बावजूद उसे वृद्धा आश्रम में रहना पड़ रहा है। पिछले 2 सालों से किसी ने कोई सुध नहीं ली। दो बेटों से तो 10 साल से बात नहीं हुई। कभी कभी एक पोता आता है और सिर्फ ₹5000 देकर चला जाता है। वह भी तब जब आगरा जिला अधिकारी ने कहा था। विद्या देवी कहती हैं कि ऐसी औलाद भगवान किसी को न दे। शादी के बाद बेटे बदल गए। कहते हैं कि तुमसे बदबू आती है। बहुएं भी ठीक से ध्यान नहीं रखती हैं। गाली गलौज करती हैं। एक बेटी है उसने भी मुंह फेर लिया है। अब वृद्धाश्रम को ही अपना घर मान लिया है। यहां उनकी कई महिला साथी हैं, जो उनकी देखभाल करती हैं। 

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