राहुल गांधी की नागरिकता पर उठे सवालों पर HC का फैसला, याचिका खारिज

Edited By Ramkesh,Updated: 02 Sep, 2026 08:25 PM

hc decision on questions raised on rahul gandhi s citizenship dismisses petitio

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप को...

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाये। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश पारित किया, जिसकी प्रति बुधवार को उपलब्ध करायी गयी। अशोक पांडेय और रजनीश कुमार सिंह द्वारा दायर की गयी याचिका में 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) रिट की मांग की गई थी जिसमें रायबरेली के सांसद के तौर पर राहुल गांधी के पदस्थ रहने के अधिकार को इस दावे के आधार पर चुनौती दी गई थी कि वह भारतीय नहीं, बल्कि ब्रिटिश नागरिक हैं। 

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने 2015 और 2019 में भी इसी तरह के मुद्दे उठाए थे। एक अन्य पीठ ने 2015 की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि नागरिकता के कथित मामले में कोई भी शिकायत नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत केंद्र सरकार के सामने उठाई जानी चाहिए। वर्ष 2019 में याचिकाकर्ता को फिर से केंद्र सरकार के पास नई अर्जी के साथ जाने की छूट दी गई थी।

मौजूदा याचिका में रजनीश कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि गांधी ने 2003 में ब्रिटेन में 'बैकऑप्स लिमिटेड' कंपनी बनाई थी और खुद को उसका निदेशक, मुख्य शेयरधारक और ब्रिटिश नागरिक बताया था। हालांकि जब आरोप को साबित करने के लिए कहा गया, तो सिंह कंपनी के पंजीकरण, 'ब्रिटिश रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज' के रिकॉर्ड या गांधी द्वारा ब्रिटिश नागरिकता का दावा करने वाले किसी भी कथित घोषणा-पत्र से जुड़ा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

सिर्फ एक दस्तावेज ही पाया गया जो 'राउल विंची' नामक व्यक्ति की शिक्षा से संबंधित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का कथित पत्र था। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह दस्तावेज याचिका में लगाए गए आरोपों को साबित नहीं करता है। इसके बाद सिंह ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी जिसे खंडपीठ ने मंजूर कर लिया और इस तरह रिट याचिका को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया गया और हर्जाने के बारे में कोई आदेश नहीं दिया । हालांकि यह प्रकरण उस मामले से अलग है जिसमें कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता ने गांधी की नागरिकता को लेकर इसी तरह के आरोप लगाए हैं।
 

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