Edited By Pooja Gill,Updated: 30 Dec, 2024 03:31 PM
बलिया: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड तैयार कराकर उत्तर प्रदेश के युवाओं को अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में रेलवे और सेना की प्रतियोगी परीक्षाओं...
बलिया: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड तैयार कराकर उत्तर प्रदेश के युवाओं को अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में रेलवे और सेना की प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित कराने वाले एक अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के मुखिया को बलिया में गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने बलिया शहर कोतवाली के जमुई गांव से रविवार को छापेमारी कर शशि भूषण उपाध्याय नामक एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एसटीएफ के निरीक्षक पुनीत परिहार की तहरीर पर बलिया शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने दर्ज प्राथमिकी का हवाला देते हुए बताया कि एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सूचना मिली थी कि बलिया जिले के आसपास के क्षेत्र से उत्तर प्रदेश के निवासी अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल खासकर कोलकाता का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर इस्तेमाल में ला रहे हैं। इसमें एक संगठित गिरोह कार्य कर रहा है।
बड़ी संख्या में बरामद किए फर्जी निवास प्रमाण पत्र
सूत्रों ने बताया कि छानबीन के दौरान यह बात सामने आई कि शशि भूषण उपाध्याय नामक व्यक्ति सेना, रेलवे और अन्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में शामिल कराने के लिए लोगों का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाता है। एसटीएफ ने रविवार को सूचना के आधार पर बलिया जिले के बांसडीह थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव के रहने वाले शशि भूषण उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया तथा उसके पास से बड़ी संख्या में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बरामद किये। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, उपाध्याय ने पूछताछ में बताया है कि वह बलिया और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को पश्चिम बंगाल खासकर कोलकाता का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर देता है। इसके आधार पर वे पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में सेना तथा रेलवे की भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। वह एक प्रमाण पत्र बनाने के लिए तीन लाख रुपए तक वसूलता था।
अन्य लोगों की तलाश कर रही पुलिस
सूत्रों के मुताबिक, उपाध्याय पश्चिम बंगाल के रहने वाले कुछ लोगों मिथुन कर्माकर, मनोज कुमार सिंह और राजन सिंह नामक शख्स के सहयोग से फर्जी निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाता था। पूछताछ में यह भी खुलासा किया है कि वह अब तक एक हजार से अधिक फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवा चुका है। वह वर्ष 2000 में फर्जी दस्तावेज के आधार पर सेना में भर्ती हुआ था। प्रमाण पत्र की जांच के दौरान पकड़े जाने के डर से उसने प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ दिया और फरार हो गया। पुलिस इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।