'भाजपा सरकार है या दुकानदार?' JPNIC के निजीकरण पर भड़के Akhilesh Yadav, लगाए गंभीर आरोप

Edited By Anil Kapoor,Updated: 26 Aug, 2026 01:32 PM

akhilesh yadav furious over privatization of jpnic makes serious allegations

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी हाथों में सौंपने के प्रदेश सरकार के फैसले पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की दिशा में आगे....

Lucknow News: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी हाथों में सौंपने के प्रदेश सरकार के फैसले पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। यादव ने कहा कि भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब उप्र की भाजपा सरकार ने लखनऊ के जे.पी.एन.आई.सी. को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।कमीशन भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और निजीकरण उसका जुगाड़।

ये भी पढ़ें:- हिजाब विवाद पर Mayawati का बड़ा बयान, बोलीं- 'अदालत घसीटने के बजाय आपसी सूझबूझ से सुलझाएं मामला'

गौरतलब है कि प्रदेश कैबिनेट ने बीते मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत जेपीएनआईसी को संचालन और रखरखाव के लिए निजी समूह को 30 वर्ष की लीज पर दिया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक चयनित निजी समूह लखनऊ विकास प्राधिकरण को 831 करोड़ रुपए का भुगतान करेगा। जेपीएनआईसी पिछली समाजवादी पार्टी सरकार की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहा है और इसे लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद भी रहा है। प्रदेश सरकार का कहना है कि करीब 265 करोड़ रुपए की प्रारंभिक योजना वाली यह परियोजना बाद में 800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च वाली परियोजना बन गई।

ये भी पढ़ें:- झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को योगी कैबिनेट की मंजूरी, 7,968 करोड़ से बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर

सरकार के मुताबिक अब इसका उद्देश्य लंबे समय से अधूरे और विवादित रहे इस परिसर को सम्मेलन, संस्कृति और खेल गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट की मंजूरी जेपीएनआईसी की संपत्ति की बिक्री के लिए नहीं है। इसके तहत इस सेंटर को 30 वर्ष की लीज पर संचालन और रखरखाव के लिए दिया जाएगा। जमीन और पूरी संपत्ति का स्वामित्व प्राधिकरण के पास ही रहेगा, जबकि चयनित बोलीदाता निविदा की शर्तों के अनुसार केंद्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। हालांकि, अखिलेश यादव ने सरकार के इस फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए इसे निजीकरण की नीति का हिस्सा बताया और भाजपा सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!