'1 जीप में 13 पुलिसवाले कैसे आए?' हाफ एनकाउंटर पर High Court के सवाल, CBI करेगी जांच

Edited By Anil Kapoor,Updated: 21 Aug, 2026 10:30 AM

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने श्रावस्ती के एक हाफ एनकाउंटर पर सख्त रुख अपनाते हुए पूरे मामले की जांच  CBI को सौंप दी है। मई 2025 में हुए इस एनकाउंटर की कहानी पर कोर्ट ने ऐसे-ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिसने यूपी पुलिस की थ्योरी की हवा....

Lucknow News: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने श्रावस्ती के एक हाफ एनकाउंटर पर सख्त रुख अपनाते हुए पूरे मामले की जांच  CBI को सौंप दी है। मई 2025 में हुए इस एनकाउंटर की कहानी पर कोर्ट ने ऐसे-ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिसने यूपी पुलिस की थ्योरी की हवा निकाल दी है। अदालत ने सिर्फ जांच के आदेश ही नहीं दिए, बल्कि एनकाउंटर करने वाले तत्कालीन एसएचओ की निशानेबाजी और शूटिंग क्षमता की जांच करने का भी निर्देश दिया है।

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हाई कोर्ट ने पुलिस की थ्योरी पर उठाए ये 4 बड़े सवाल:- 
हाई कोर्ट का पुलिस की थ्योरी पर पहला सवाल
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, आरोपी को पकड़ने गई टीम में इंस्पेक्टर, 5 सब-इंस्पेक्टर, 1 हेड कांस्टेबल और 6 कांस्टेबल—यानी कुल 13 पुलिसकर्मी शामिल थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य पुलिस जीप या एसयूवी (SUV) में 13 लोगों के बैठने की क्षमता ही नहीं होती। इतने लोग तो किसी मिनी बस में ही आ सकते हैं। सीबीआई अब पता लगाएगी कि पुलिस मौके पर किस गाड़ी से पहुंची थी।

हाई कोर्ट का पुलिस की थ्योरी पर दूसरा सवाल
पुलिस का दावा था कि मौके पर कुल 23 पुलिसकर्मियों ने आरोपी को घेर रखा था। आरोपी अलाउद्दीन ने पुलिस पर सीधी फायरिंग की। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि 23 पुलिसकर्मियों के बीच घिरे होने के बाद भी आरोपी की गोली से एक भी पुलिसवाला घायल क्यों नहीं हुआ?

हाई कोर्ट का पुलिस की थ्योरी पर तीसरा सवाल
पुलिस के मुताबिक, घटना रात करीब 11 बजे घने अंधेरे में हुई। एसएचओ आरोपी से करीब 15 मीटर की दूरी पर थे। इतने अंधेरे और दूरी के बावजूद एसएचओ की चलाई गोली सीधे आरोपी के दोनों पैरों में जाकर लगी। कोर्ट ने इस 'सटीक निशानेबाजी' पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाई कोर्ट का पुलिस की थ्योरी पर चौथा सवाल
पुलिस की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि एसएचओ ने रात के अंधेरे में आरोपी के तमंचा लोड करने की आवाज सुनी और उसी आवाज पर निशाना साधकर गोली चला दी। कोर्ट ने सीबीआई से यह परखने को कहा है कि क्या ऐसी परिस्थितियों में केवल आवाज सुनकर ऐसा सटीक निशाना लगाना व्यावहारिक रूप से संभव है।

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बताया जा रहा है कि अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 3 महीने के भीतर अपनी निष्पक्ष जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को तय की गई है। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

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