हाईटेक मुन्नाभाइयों का पर्दाफाश: कूरियर से कनाडा तक भेजी जा रही थीं PhD की फर्जी डिग्रियां... असली से भी बेहतर थी प्रिंटिंग!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 10 Jun, 2026 06:43 AM

fake marksheet racket busted in kanpur mastermind and 4 others arrested

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में पुलिस ने मंगलवार को फर्जी अंकपत्र और डिग्री बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के...

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में पुलिस ने मंगलवार को फर्जी अंकपत्र और डिग्री बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के तार देश और विदेश से जुड़े होने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई किदवई नगर और बेकनगंज इलाकों में की गई छापेमारी के दौरान हुई, जहां एक रिहायशी इमारत में हाई-टेक अवैध प्रिंटिंग सेटअप चलाया जा रहा था।

मास्टरमाइंड जिया-उल-हसन और उसके 3 भाई गिरफ्तार
जांच में सामने आया है कि आरोपी हाई स्कूल से लेकर पीएचडी स्तर तक की नकली शैक्षणिक डिग्रियां और अंकपत्र तैयार कर रहे थे तथा उन्हें कूरियर और डिजिटल माध्यमों से देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजा जा रहा था। पुलिस ने कथित सरगना की पहचान जिया-उल-हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ (32) के रूप में की है, जो हीरामन पुरवा का निवासी है और वर्तमान में चमनगंज के नाला रोड स्थित इकबाल बिल्डिंग में रह रहा था। उसके साथ उसके भाई हसन आसिफ (34), आमिर अहमद (33) और नूरुद्दीन (30) को भी गिरफ्तार किया गया है।

छापेमारी में 141 रबर स्टांप और 830 खाली मार्कशीट बरामद
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि तैयार किए जा रहे नकली दस्तावेज असली जैसे प्रतीत होते थे। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो प्रिंट की गुणवत्ता असली प्रमाणपत्रों से भी बेहतर लग रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 2 लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप, कलर प्रिंटर, सीपीयू, 3 हार्ड डिस्क, वाई-फाई राउटर, विभिन्न विश्वविद्यालयों के 141 रबर स्टांप, 80 होलोग्राम स्ट्रिप, होलोग्राम डाई, फ्लोटिंग पंच डाई, 830 खाली मार्कशीट शीट, बड़ी मात्रा में प्रिंटिंग सामग्री तथा कई नकली सर्टिफिकेट और डिग्रियां बरामद कीं।

कानपुर यूनिवर्सिटी समेत देश के 8 बड़े विश्वविद्यालय निशाने पर
पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह कई वर्षों से सक्रिय था और प्रत्येक नकली अंकपत्र या प्रमाणपत्र के लिए 10,000 से 15,000 रुपए तक वसूलता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कम से कम 8 विश्वविद्यालयों और बोर्डों के नाम पर नकली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे, जिनमें अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगायाज विद्यापीठ, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, डीवाई पाटिल विद्यापीठ, अलगप्पा यूनिवर्सिटी, आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर शामिल हैं।

कूरियर से कनाडा कनेक्शन का खुलासा
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह फिशिंग वेबसाइट्स के जरिए नकली ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम भी तैयार करता था, जिससे दस्तावेज जांच के दौरान असली प्रतीत होते थे। जांच में इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का भी खुलासा हुआ है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि जिया-उल-हसन कनाडा में रहने वाले 2 साथियों भावीन और बारी के संपर्क में था, जिन्हें वह नकली दस्तावेजों की पीडीएफ और कोरड्रा फाइलें भेजता था। इनका उपयोग विदेशों में नौकरी पाने के लिए किया जाता था। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। सभी 4 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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