Edited By Purnima Singh,Updated: 29 Jul, 2026 12:15 PM

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर तीखा हमला करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि उसने स्कूलों के विलय के नाम पर हजारों प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए हैं और इससे वंचित वर्गों के...
लखनऊ/नयी दिल्ली : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर तीखा हमला करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि उसने स्कूलों के विलय के नाम पर हजारों प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए हैं और इससे वंचित वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने हालांकि इन आरोपों को 'निराधार' बताते हुए कहा कि सरकार ने कोई भी सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केवल कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती स्कूलों में विलय किया गया है।
'देश में एक लाख प्राइमरी स्कूल बंद किए गए'
लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारें शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बार-बार दावे करने के बावजूद इसमें सुधार करने में विफल रही हैं। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि देशभर में एक लाख से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने कहा, ''भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए हैं। बड़ी संख्या में माध्यमिक विद्यालय भी बंद किए गए हैं।'' संसद परिसर के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह आरोप दोहराते हुए दावा किया कि राज्य में विलय के नाम पर लगभग 22,000 प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ''देशभर में प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में करीब 22,000 विद्यालय बंद हुए हैं। चाहे इसे विलय का नाम दिया जाए, लेकिन स्कूल तो बंद हुए हैं। ऐसे बड़ी संख्या में विद्यालय मुख्यमंत्री के गृह जिले गोरखपुर में भी हैं।'' यादव ने दावा किया कि इंटरमीडिएट विद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रवेश घट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार रोजगार उपलब्ध कराने और आरक्षण की रक्षा करने के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है।