Edited By Purnima Singh,Updated: 17 Jun, 2026 05:17 PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के पारदर्शी पुलिस भर्ती सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त प्रणाली की शुरूआत राज्य में पुलिस व्यवस्था में सुधारों का हिस्सा है।...
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के पारदर्शी पुलिस भर्ती सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त प्रणाली की शुरूआत राज्य में पुलिस व्यवस्था में सुधारों का हिस्सा है। आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव 1972 से लंबित थे, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने दावा किया कि आईपीएस अधिकारियों को पहले प्रशासनिक मामलों में आईएएस अधिकारियों के प्रभुत्व का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, ''पहले उत्तर प्रदेश में आईपीएस अधिकारियों को आईएएस अधिकारियों द्वारा दबाया जाता था। वे फाइलों को दबाकर रखते थे। एक बार जब कोई फाइल बंद हो जाती थी, तो उसे दोबारा खुलवाना लगभग असंभव होता था। यहां तक कि अगर यमराज भी आ जाएं, तो उस फाइल को आईएएस अधिकारी से खुलवाना मुश्किल होता था।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य के सात जिलों में आयुक्त प्रणाली लागू हो गई है जो पुलिस सुधारों का एक हिस्सा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी 2020 में गौतमबुद्धनगर और लखनऊ से शुरुआत करते हुए पुलिस व्यवस्था की आयुक्त प्रणाली की स्थापना की थी। यह प्रणाली अंततः पांच और जिलों वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर और आगरा में शुरू की गई। आयुक्त प्रणाली के तहत, पुलिस आयुक्त (एक आईपीएस अधिकारी) बढ़ी हुई कार्यकारी शक्तियों के साथ पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करता है, जो पहले की व्यवस्था की जगह लेता है।