Edited By Purnima Singh,Updated: 24 Jun, 2026 03:20 PM

न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अपने एक ऐसे महान खिलाड़ी को खो दिया है, जिसकी पहचान केवल विकेटों या रिकॉर्डों से नहीं, बल्कि अदम्य साहस और असाधारण मानसिक दृढ़ता से भी थी। पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का 94 वर्ष की आयु में इंग्लैंड में निधन हो गया। उनके निधन...
UP Desk : न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अपने एक ऐसे महान खिलाड़ी को खो दिया है, जिसकी पहचान केवल विकेटों या रिकॉर्डों से नहीं, बल्कि अदम्य साहस और असाधारण मानसिक दृढ़ता से भी थी। पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का 94 वर्ष की आयु में इंग्लैंड में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड (एनजेडसी) ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को खेल इतिहास का अमूल्य अध्याय बताया है। एनजेडसी ने घोषणा की है कि इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के पहले दिन न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ब्लेयर की स्मृति में काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरेंगे।
टांगीवाई रेल हादसे ने बदल दी जिंदगी
बॉब ब्लेयर के जीवन का सबसे मार्मिक अध्याय दिसंबर 1953 में सामने आया था। उस समय न्यूजीलैंड की टीम दक्षिण अफ्रीका दौरे पर थी। जोहान्सबर्ग टेस्ट के दौरान उन्हें यह दुखद समाचार मिला कि न्यूजीलैंड में हुए भीषण टांगीवाई रेल हादसे में उनकी मंगेतर नेरिसा लव सहित 151 लोगों की मौत हो गई है।
इस हादसे ने ब्लेयर और पूरी टीम को झकझोर कर रख दिया। माना जा रहा था कि वह मैच में आगे हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन उन्होंने असाधारण साहस का परिचय देते हुए टीम के लिए मैदान पर उतरने का फैसला किया।
जब पूरे स्टेडियम ने खड़े होकर किया सम्मान
न्यूजीलैंड की टीम संकट में थी और अंतिम विकेट बाकी था। ऐसे में ब्लेयर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर पहुंचे। उन्हें देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक भावुक हो उठे। उन्होंने अनुभवी बल्लेबाज बर्ट सटक्लिफ के साथ आखिरी विकेट के लिए 33 रनों की यादगार साझेदारी की।
इस साझेदारी के दौरान एक ओवर में 25 रन भी बने, जो उस दौर में बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती थी। जब ब्लेयर आउट होकर पवेलियन लौटे तो विरोधी टीम के खिलाड़ियों और दर्शकों ने खड़े होकर उनका सम्मान किया। यह पल क्रिकेट इतिहास के सबसे भावनात्मक क्षणों में गिना जाता है।
शानदार रहा अंतरराष्ट्रीय करियर
बॉब ब्लेयर ने 1952 से 1964 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 19 टेस्ट मैच खेले और 43 विकेट अपने नाम किए। उन्होंने अपने अंतिम टेस्ट मैच में सात विकेट लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को यादगार अंदाज में अलविदा कहा।
हालांकि उनके घरेलू क्रिकेट के आंकड़े और भी प्रभावशाली रहे। उन्होंने केवल 59 प्रथम श्रेणी मैचों में 330 विकेट हासिल किए। 1956-57 का घरेलू सत्र उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ दौर माना जाता है, जब उन्होंने नौ की औसत से 46 विकेट चटकाए। इस दौरान उन्होंने दो अलग-अलग पारियों में नौ-नौ विकेट लेने का दुर्लभ कारनामा भी किया।
संन्यास के बाद भी क्रिकेट से जुड़े रहे
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ब्लेयर का खेल के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ। उन्होंने इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में कोचिंग देकर युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया।
खेल के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी वह नियमित रूप से मैदान पर क्रिकेट खेलते दिखाई देते थे। उनके निधन के साथ क्रिकेट जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी को खो दिया है, जिसने अपने खेल और व्यक्तित्व दोनों से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।