Lucknow Fire Incident: अगर 10 साल पहले गिरा दी जाती इमारत, तो बच जाती 15 मासूमों की जान, जानें क्या है वजह

Edited By Purnima Singh,Updated: 23 Jun, 2026 09:35 AM

lucknow fire incident building was supposed to be demolished in 2016

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को आग हादसे की शिकार हुई तीन मंजिला इमारत को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो माह से भी कम वक्त में ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से देर रात यहां जारी...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को आग हादसे की शिकार हुई तीन मंजिला इमारत को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो माह से भी कम वक्त में ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से देर रात यहां जारी एक बयान के मुताबिक इमारत से जुड़े पुराने दस्तावेज और लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं।

अवैध निर्माण को लेकर हुई थी कार्रवाई
बयान के अनुसार सोमवार को जिस इमारत में आग लगने की घटना हुई उसके खिलाफ 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था लेकिन दो महीने से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया था।

1980 में हुआ था आवंटन
बयान के मुताबिक अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित इस इमारत को 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था और उसी साल चार नवंबर को इमारत का कब्जा सौंप दिया गया था।

कई बार बदला स्वामित्व
अधिकारियों के अनुसार साल 2005 में यह इमारत विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज की गयी, जिसे 19 जनवरी 2013 को दम्पति ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया।

2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत हुआ मानचित्र
उन्होंने बताया कि करीब 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। हालांकि बाद में इमारत में अनाधिकृत निर्माण की बात सामने आने पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। बयान के अनुसार जांच के बाद 10 मई 2016 को अनाधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया लेकिन दो महीने के अंदर पांच जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।

आग हादसे में 15 लोगों की मौत
इसी इमारत में सोमवार को लगी भीषण आग में झुलसकर कम से कम 15 लोगों की मौत हो गयी तथा नौ अन्य जख्मी हो गये। पुलिस ने इस मामले में इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की जद में आयी इमारत के संयुक्त रूप से मालिक थे।

 

 

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