Edited By Purnima Singh,Updated: 07 Jul, 2026 12:07 PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में श्रमिकों एवं उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। राज्य के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री...
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में श्रमिकों एवं उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। राज्य के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी दी।
गोरखपुर और मुरादाबाद में बनेंगे 100-100 बेड के ESIC अस्पताल
उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि मंत्रिमंडल ने गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 शय्याओं के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अस्पतालों तथा वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से इन परियोजनाओं के लिए भारत सरकार को निःशुल्क और रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
मुरादाबाद में हजारों श्रमिक परिवारों को मिलेगा लाभ
राजभर ने बताया कि मुरादाबाद में अस्पताल निर्माण के लिए हरथला गांव में 2.025 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि भारत सरकार को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में प्रस्तावित 100 शैय्या के अस्पताल से लगभग 93,591 बीमांकित श्रमिकों और उनके 3,55,646 परिजनों को चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। राजभर ने बताया कि अस्पताल का निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा कराया जाएगा।
गोरखपुर में रियायती दर पर दी जाएगी भूमि
उन्होंने बताया कि इसी तरह गोरखपुर के गीडा सेक्टर-09 में करीब 5.249 एकड़ भूमि पर 100 बेड का ईएसआईसी अस्पताल बनाया जाएगा। राजभर ने बताया कि परियोजना को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि की दर 8720 रुपये प्रति वर्ग मीटर के स्थान पर रियायती 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
वाराणसी में बनेगा ESIC मेडिकल कॉलेज
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री ने बताया कि वाराणसी में बनने वाले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के लिए पिंडरा तहसील के पिंडरा गांव में लगभग 13 एकड़ भूमि भारत सरकार को निशुल्क दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कॉलेज में एमबीबीएस की अधिसंख्य सीटें उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों को उपलब्ध होंगी जबकि 50 प्रतिशत एमबीबीएस सीटें बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। राजभर ने बताया कि इसके अलावा 18 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार तथा सात प्रतिशत सीटों पर केंद्र सरकार के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा।