सास-ससुर बने मां-बाप, विधवा बहू का कन्यादान कर पेश की इंसानियत की मिसाल

Edited By Nitika,Updated: 02 Dec, 2018 05:58 PM

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मात्र 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित  बालावाला का चंद्र परिवार छोटी सोच रखने के बावजूद भी समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गया है।

देहरादूनः उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मात्र 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित  बालावाला का चंद्र परिवार छोटी सोच रखने के बावजूद भी समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। इन दिनों सबकी जुबान पर चंद्र परिवार चढ़ा हुआ है। परिवार के सास-ससुर ने अपनी विधवा बहू का कन्यादान कर उसकी दूसरी शादी करके इंसानियत की मिसाल पेश की है। 
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एक साल बाद कवीता के पति की डूबने से हुई मौत 
देहरादून के बालावाला में रहने वाले पति पत्नी विनोद चंद और कला चंद। चंद परिवार की बहू के रूप में 2014 में घर आई कवीता के बाद पूरे घर में खुशियां सी आ गई थी। पूरा परिवार बेहद खुश था और अपने बेटे संदीप चंद के लिए बहू लाकर और ससुराल ने कवीता को इतना प्यार दिया जिससे कवीता भी बेहद खुश रहती थी लेकिन एक साल बाद 2015 में ना जाने इस हंसते खेलते परिवार को किसकी नजर लग गई। कवीता चंद का पति संदीप हरिद्वार में अपने दोस्तों के साथ नहाने गया था लेकिन फिर कभी वापस नहीं लोटा। गंगा में नहाते समय संदीप की डूबने से मौत हो गई थी। हंसता खेलता चंद परिवार टूट गया और कवीता की मांग के सिंदूर मिट गया। बेटे के जाने से परिवार को तो बड़ा सदमा लगा ही था लेकिन 1 साल बाद ही पति का साया सर से छिन जाना कवीता के लिए बेहद दुखदाई था। बेटा तो कभी भी वापस नहीं आ सकता था लेकिन परिवार वालो से विधवा बहू का दुख नहीं देखा जा रहा था। 
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कवीता की शादी कर ससुराल बना मायका
परिवार वालों ने कवीता की खुशी के लिए उसकी दूसरी शादी करने की सोची ताकि कवीता की पूरी जिंदगी इस तरह से दुख के साए में ना कटे। कवीता के चाचा बताते हैं की बेटे के जाने के बाद पूरा परिवार बुरी तरह से टूट गया था लेकिन हमने अपनी बहू को पूरा हौसला दिया साथ ही कवीता ने भी अपने साथ-साथ पूरे परिवार को हौसला दिया। समाज के द्वारा भी कई बाते की जाती थी। लड़की को मायके भेज दो लेकिन हमने कवीता को बहू नहीं बेटी माना और इसीलिए कवीता की शादी बेटी मानकर पूरे रस्मो-रिवाज के साथ की। बेटे के चले जाने के बाद पूरा परिवार बेटे के दुख में तो था ही लेकिन अपनी बहू कवीता के लिए इस सोच में था की उनकी जवान बहू कैसे एक विधवा की जिंदगी जीएगी। इसीलिए पूरे परिवार ने कवीता की खुशी के लिए कवीता को बेटी मानकर उसका पूरे रस्मो-रिवाज के साथ विवाह कर दिया और कवीता का यह ससुराल उसके लिए अब मायका बन गया है। 
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चंद्र परिवार की सोशल मीडिया पर हो रही वाहवाही 
बता दें कि चंद्र परिवार की इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वाहवाही हो रही है। बहु को बेटी की तरह विदा कर इन्होंने समाज को एक बड़ी सीख दी है। यदि हर परिवार चंद्र परिवार बन जाए तो 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान करने की जरूरत शायद कभी ना पड़े। 
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