अनसूचित जाति का उत्पीड़न हो बंद: रामशंकर कठेरिया

Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 06 Oct, 2019 12:39 PM

ramshankar katheria says harassment of untouchable

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति.जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ राम शंकर कठेरिया ने शनिवार को कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। डॉ कठेरिया ने कहा कि अनुसूचित जाति की अधिसंख्य आबादी गरीब है। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हे...

इटावाः राष्ट्रीय अनुसूचित जाति.जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ राम शंकर कठेरिया ने शनिवार को कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। डॉ कठेरिया ने कहा कि अनुसूचित जाति की अधिसंख्य आबादी गरीब है। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हेाती है। वह मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते है। उनके हत्या से संबंधित,रेप से संबंधित प्रकरणों में समय से लाभ दिया दिये। स्वच्छ शौचालयो निर्माण में गड़बडियां होती है इसलिए सेक्रेटरी के ऊपर अंकुश लगाया जाये।

अनुसूचित जाति के उत्पीडन एवं विकास कार्यो की कानपुर मण्डल स्तरीय समीक्षा के दौरान उन्होने कहा कि जिले की कुल जनसंख्या के अनुसार सरकार द्वारा संचालित जन कल्याणकारी येाजनाओ में अनुसूचित जाति के लोगो को लाभान्वित किया जाये इसमे किसी प्रकार की षिथिलता न बरती जाये। उन्हें सभी योजनाओं में लाभांवित करने के लिये ध्यान दिया जाये। उन्होने कहा कि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की हत्या के प्रकरणों, रेप के प्रकरणों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी अलग से मदद की जाये।

उन्होंने कहा कि 2011की जनगणना सूचीं में अनुसूचित जाति के लोगो की संख्या कितनी थी उसकी सूचना उपलब्ध करायी जाये। प्राथमिक विद्यालयो में पंजीकृत छात्रो के सापेक्ष आकलन कराया जाये कि विद्यालयो में कितने अनुसूचित जाति के छात्र अध्ययनरत है। हत्या जैसे प्रकरणो में एफआईआर दर्ज की जाये, छा़त्रों को शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाये। डा कठेरिया ने कहा कि जिलों में मुद्रा ऋण,स्टेण्डअप योजना में ऋण वितरण की प्रगति खराब पाये जाने पर सभी जिलाधिकारियो को निर्देशित किया कि वह अपने अपने जिले में बैंकर्स के साथ बैठके कर सरकार द्वारा संचालित येाजनाओ में लाभार्थियों का ऋण स्वीकृत कराकर उन्हें अधिक से अधिक लाभान्वित किया जाये।

उन्होंने कहा कि जनपदों सरकारी छात्रावास बने हुए हेै उनका एक माह में सर्वे कर सूचना उपलब्ध करायी जाये। उन्होने कहा कि लिट्रेसी वाले प्रकरण को गंभीरता से लिया जाये इसमे अनुसूचित जाति की महिलाओ का बहुत बडा अन्तर मिलेगा इस अन्तर को खत्म करना होगा।





 

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