Edited By Ajay kumar,Updated: 15 Jul, 2023 05:28 PM

अवैध धर्मांतरण के प्रकरणों पर प्रभावी अंकुश लगाने की कवायद हो रही है। इसे लेकर सक्रिय एटीएस ने पश्चिम यूपी के कुछ शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों की सोशल मीडिया की गतिविधि पर नजर रखी हुई है। सोशल मीडिया की स्क्रीनिंग के साथ ही एटीएस धार्मिक शिक्षा से...
लखनऊ: अवैध धर्मांतरण के प्रकरणों पर प्रभावी अंकुश लगाने की कवायद हो रही है। इसे लेकर सक्रिय एटीएस ने पश्चिम यूपी के कुछ शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों की सोशल मीडिया की गतिविधि पर नजर रखी हुई है। सोशल मीडिया की स्क्रीनिंग के साथ ही एटीएस धार्मिक शिक्षा से जुड़े कुछ केंद्रों पर नजर रख रही है।

अवैध धर्मांतरण मामले में तीन आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है ATS
कुछ दिनों पहले ही एटीएस ने सहारनपुर से अवैध धर्मांतरण मामले में तीन आरोपी को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान सहारनपुर निवासी नाजिम हसन उर्फ राशिद, मोहम्मद सादिक और अजहर मलिक के रूप में हुई थी। यह गिरफ्तारी तब हुई तब यूपी एटीएस को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग लालच देकर बहला फुसलाकर और जहन्नुम का भय दिखाकर अवैध धर्मांतरण का काम रही थी। कर रहे हैं।
पिछले साल ATS को 100 करोड़ की विदेशी फंडिंग के मिले थे सबूत
पिछले साल भी एटीएस ने अवैध धर्मांतरण से जुड़े लोगों और उनकी संस्थाओं को लगभग 100 करोड़ की विदेशी फंडिंग के सबूत मिले थे। इस मामले में तब पाया गया था कि गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों में दो आरोपी अलकायदा के भी संपर्क में आ चुके थे। गिरफ्तार किए गए गणेश प्रसाद कावरे उर्फ एडम और कौसर आलम दोनों ही आरोपी अलकायदा के संपर्क में थे। जांच में सामने आया था कि हवाला के जरिए अवैध धर्मांतरण के इस अभियान की लंदन से लेकर अमेरिका व खाड़ी देशों से फंडिंग हो रही थी, जिसमें गुजरात से ऑपरेट होने वाला हवाला सिंडिकेट अहम भूमिका में था। तब दिल्ली से गिरफ्तार किए गए मौलाना उमर गौतम और जहांगीर आलम ने कबूला था कि अवैध धर्मांतरण के सिंडिकेट को बड़े पैमाने पर विदेशों से फंडिंग की जा रही थी।