‘मेक इन इंडिया’ की झलक: अब 4 दिन तक वैक्सीन रहेगी सुरक्षित… PSIT छात्र हर्ष शर्मा ने बनाई पोर्टेबल कूलिंग डिवाइस

Edited By Mamta Yadav,Updated: 28 Oct, 2025 05:51 AM

a glimpse of  make in india  vaccines will now be safe for up to 4 days

कानपुर के प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (PSIT) के छात्र हर्ष शर्मा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐसा नवाचार किया है, जो भारत में दवाओं और वैक्सीन के भंडारण के तरीके को बदल सकता है। फार्मेसी विभाग के इस अंतिम वर्ष के छात्र ने एक...

Kanpur News: कानपुर के प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (PSIT) के छात्र हर्ष शर्मा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐसा नवाचार किया है, जो भारत में दवाओं और वैक्सीन के भंडारण के तरीके को बदल सकता है। फार्मेसी विभाग के इस अंतिम वर्ष के छात्र ने एक थर्मोइलेक्ट्रिक कूलिंग डिवाइस विकसित की है, जो एक बार चार्ज करने पर चार दिनों तक 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रख सकती है। यह डिवाइस न केवल पोर्टेबल और बैटरी-ड्रिवन है, बल्कि इसमें लगा स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम तापमान और बैटरी स्तर की रियल टाइम जानकारी मोबाइल ऐप पर देता है। हर्ष ने इस डिवाइस के लिए भारत और अमेरिका में पेटेंट आवेदन दाखिल किया है।
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थर्मोइलेक्ट्रिक तकनीक से तैयार, ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान
यह डिवाइस आकार में एक कॉम्पैक्ट बॉक्स जैसी है, जिसे खास तौर पर उन जगहों के लिए डिजाइन किया गया है जहां बिजली की आपूर्ति सीमित या अस्थिर रहती है। थर्मोइलेक्ट्रिक तकनीक से बनी यह डिवाइस बिजली की बहुत कम खपत करती है और तापमान को लंबे समय तक स्थिर रखती है। इसका उपयोग न केवल वैक्सीन और दवाओं, बल्कि ब्लड सैंपल्स और जैविक उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए भी किया जा सकता है।

स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम बनाता है इसे खास

  • डिवाइस में लगे सेंसर तापमान, बैटरी स्तर और स्टोरेज की निगरानी करते हैं।
  • ये डेटा रियल टाइम में एक मोबाइल ऐप पर देखा जा सकता है।
  • अगर तापमान में उतार-चढ़ाव या बैटरी में कमी होती है, तो ऐप तत्काल अलर्ट नोटिफिकेशन भेजता है।
  • हर्ष का कहना है कि यह सिस्टम ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए बेहद उपयोगी रहेगा, क्योंकि इसे चलाना आसान और यूजर-फ्रेंडली है।


आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में ला सकता है क्रांति
पीएसआईटी के समूह निदेशक प्रोफेसर मनमोहन शुक्ला के मार्गदर्शन में तैयार यह प्रोजेक्ट फिलहाल टेस्टिंग फेज में है। प्रो. शुक्ला ने कहा, “यह डिवाइस मौजूदा कोल्ड चेन समाधानों की तुलना में अधिक किफायती, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ है। इसे व्यावसायिक रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह नवाचार आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

‘मेक इन इंडिया’ की भावना के साथ आत्मनिर्भर हेल्थकेयर की ओर कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नवाचार भारत को आत्मनिर्भर हेल्थकेयर सिस्टम की दिशा में मजबूत बना सकते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन वितरण में सामने आई चुनौतियों ने इस क्षेत्र में स्थानीय तकनीकी समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित किया था। पीएसआईटी जैसे संस्थान छात्रों को व्यावहारिक नवाचारों के लिए मंच देकर इसी दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

भविष्य की दिशा – सोलर चार्जिंग और वैश्विक उपयोग
हर्ष शर्मा का कहना है कि वे भविष्य में इस डिवाइस में सोलर चार्जिंग जैसी सुविधाएँ जोड़ने की योजना बना रहे हैं, ताकि यह पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बने। उन्हें इस प्रोटोटाइप के लिए कई स्टार्टअप फंडिंग ऑफर भी मिले हैं। यह छोटा-सा बॉक्स भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

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