संभल में महाघोटाला: 162 लोगों को बांट दी गंगा किनारे की सरकारी जमीन, रिटायर्ड SDM सहित 6 गिरफ्तार... 19 पर FIR

Edited By Anil Kapoor,Updated: 04 Jul, 2026 08:54 AM

retired sdm among 19 others booked for fake lease allotment case six arrested

उत्तर प्रदेश में संभल जिले के गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे झाऊ श्रेणी की सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम (अब सेवानिवृत्त) और पूर्व डीजीसी समेत 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से 6 आरोपियों को...

Sambhal News: उत्तर प्रदेश में संभल जिले के गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे झाऊ श्रेणी की सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम (अब सेवानिवृत्त) और पूर्व डीजीसी समेत 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से 6 आरोपियों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर विधिक प्रक्रिया पूरी करके जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

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पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शुक्रवार को तत्कालीन सेवानिवृत्त उप जिलाधिकारी (SDM) ओमवीर सिंह, सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक राजवीर, पूर्व डीजीसी जय भारद्वाज, तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी महेंद्र, असदपुर के पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत और तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव को गिरफ्तार करके विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल भेज दिया गया।अधिकारियों के अनुसार, लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर थाना गुन्नौर में 2 जुलाई को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी और आपराधिक साजिश आदि धाराओं में गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की गई।

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दर्ज प्राथमिकी में सेवानिवृत्त उप जिलाधिकारी (SDM) ओमवीर सिंह निवासी अलीगढ़, तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान एसडीएम करम सिंह, तत्कालीन ग्राम प्रधान विक्रांत, असदपुर, पूर्व डीजीसी (राजस्व) जय भारद्वाज, ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीण कुमार, संतोष कुमार, जलधारा, मोहरश्री, किशनलाल, देवेंद्र कुमार, लेखपाल सर्वेश कुमारी, ओमकार सिंह, अमित कुमार, सेवानिवृत्त कानूनगो राजवीर सिंह, रक्षपाल सिंह, रिटायर्ड चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह, सतीश गुप्ता और ओमवीर सिंह नामजद हैं। यह मामला तहसील गुन्नौर के असदपुर, सुलेखा समेत कई गांवों में गंगा किनारे झाऊ श्रेणी की सरकारी भूमि के अवैध आवंटन से जुड़ा है।

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प्राथमिकी के मुताबिक, ग्राम सुखैला की करीब 71.55 हेक्टेयर यानी 1000 बीघा चकबंदी प्रक्रिया वाली जमीन में 2007 के बाद फर्जी तरीके से अभिलेखों में प्रविष्टियां कर दी गईं। इस मामले में 2018 में भी तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों और 58 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र में केस दर्ज हुआ था। तब फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई थीं। आरोप है कि इसके बावजूद 2019 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने 162 लाभार्थियों के पक्ष में फिर से पट्टे स्वीकृत कर दिए। जांच में भूमि के क्षेत्रफल और लाभार्थियों की संख्या में गंभीर विसंगतियां मिलीं। वर्ष 2021-22 में संशोधन की कार्रवाई हुई, लेकिन राजस्व संहिता के तहत खुली ग्राम सभा, सहमति या लॉटरी की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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तहरीर में कहा गया है कि 2023 में 17 अपात्र लाभार्थियों के पट्टे निरस्त होने के बावजूद अभिलेखों में 145 लाभार्थियों के नाम दर्ज रहे। किसी को भी वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया कूटरचित दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी कर पूरी की गई। जांच समिति ने चार जून 2026 को जिलाधिकारी संभल को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसी आधार पर दो जुलाई को गुन्नौर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई।

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