इलाहाबाद HC की तीखी टिप्पणी- 'हलाला और तीन तलाक के नाम पर शोषण बर्दाश्त नहीं, यह सुनियोजित गैंगरे/प'

Edited By Anil Kapoor,Updated: 03 Jul, 2026 03:37 PM

exploitation under guise of halala and triple talaq will not be permitted

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और 3 तलाक जैसी कुप्रथाओं पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) की आड़ लेकर महिलाओं के यौन शोषण की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इन प्रथाओं को समाज का काला...

Allahabad News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और 3 तलाक जैसी कुप्रथाओं पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) की आड़ लेकर महिलाओं के यौन शोषण की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इन प्रथाओं को समाज का काला पन्ना करार देते हुए कहा कि ये पूरी तरह से संवैधानिक मूल्यों, लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं। न्यायालय के मुताबिक, ऐसे कृत्य न केवल कानूनी तौर पर संगीन अपराध हैं, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को भी झकझोर कर रख देते हैं।

हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपियों की याचिका
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता के पूर्व पति, चाचा और मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। इन आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि क्रिमिनल लॉ के सामने पर्सनल लॉ की दलीलें नहीं दी जा सकतीं, जब तक कि कानून खुद इसकी छूट न दे। पहली नजर में यह मामला एक नाबालिग बच्ची के साथ सुनियोजित तरीके से किए गए सामूहिक दुष्कर्म का नजर आता है, जिसकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है। रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर जांच को शुरुआती चरण में ही ठप नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?
यह झकझोर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सैदनागली थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कम उम्र में जबरन निकाह, तीन तलाक और फिर हलाला के नाम पर सिलसिलेवार तरीके से हुए यौन शोषण की दर्दनाक कहानी बयां की है।

FIR के मुताबिक घटनाक्रम इस तरह है:-
- अप्रैल 2015: पीड़िता की उम्र जब महज 15 साल (नाबालिग) थी, तब उसका निकाह जबरन मुख्य आरोपी अजहर नवाज के साथ करा दिया गया।
- जनवरी 2016: शादी के कुछ ही महीनों बाद आरोपी नवाज ने उसे तीन तलाक दे दिया।
- नंवबर 2016: नवाज ने दोबारा शादी की इच्छा जताई, जिसके लिए पीड़िता को सह-आकपोपी मौलाना कयूम के साथ 'निकाह हलाला' करने पर मजबूर किया गया। तब पीड़िता 16 साल की थी और मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसने कहा कि उसे हलाला का मतलब तक नहीं पता था, वहां उसके साथ रेप किया गया।
- साल 2017: हलाला की प्रक्रिया के बाद नवाज ने उससे दोबारा निकाह किया, लेकिन चार साल बाद फिर तलाक देकर दूसरी महिला से शादी कर ली।

डबल हलाला के नाम पर गैंगरेप
मामला यहीं नहीं रुका। नवाज की दूसरी पत्नी से जब बच्चे नहीं हुए, तो उसने और उसके भाइयों ने पीड़िता को वापस बुलाने का दबाव बनाया। उन्होंने दलील दी कि चूंकि उसका निकाह दो बार टूटा है, इसलिए उसे इस बार दो बार हलाला (डबल हलाला) करना होगा। आरोप है कि इसी साजिश के तहत पिछले साल 19 फरवरी 2025 को मुख्य आरोपी के भाई और भतीजों ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया और उसी शाम को एक झूठा निकाह भी पढ़ा दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि अब तक सामने आए तथ्य बेहद संगीन हैं। हलाला के नाम पर जिस तरह नाबालिग उम्र से उसका शोषण किया गया और बाद में गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया, उसकी पूरी विवेचना की जाएगी और आरोपियों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

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