COVID ड्यूटी का मतलब सिर्फ अस्पताल नहीं!' हाईकोर्ट का UP सरकार को झटका, शहीद पुलिसकर्मी की विधवा को 8 हफ्ते में दें ₹50 लाख

Edited By Anil Kapoor,Updated: 09 Jul, 2026 06:41 AM

give 50 lakh to the widow of a policeman martyred due to covid

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल की विधवा को 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं में लगे सरकारी...

Lucknow News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल की विधवा को 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि महामारी के दौरान आवश्यक सेवाओं में लगे सरकारी कर्मचारियों को कोविड ड्यूटी पर तैनात माना जाना चाहिए। अदालत की लखनऊ पीठ ने दिवंगत हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप की विधवा सीमा भारती के मुआवजे के दावे को खारिज करने वाले राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया और आठ सप्ताह के भीतर राशि जारी करने का निर्देश दिया।

आधिकारिक रिकॉर्ड से साबित हुई कोविड ड्यूटी
याचिकाकर्ता के दावे को राज्य सरकार के 11 अप्रैल 2020 के शासनादेश के तहत दाखिल किया गया था, जिसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि मृतक कोविड की रोकथाम, इलाज या नियंत्रण से जुड़ी ड्यूटी में तैनात नहीं थे। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की पीठ ने हालांकि कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी व पुलिस विभाग द्वारा जारी प्रमाणपत्रों समेत आधिकारिक रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि प्रताप को कोविड की रोकथाम और नियंत्रण, जन जागरूकता फैलाने तथा संक्रमित लोगों की सहायता के लिए तैनात किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग ने उनके परिवार को अनुग्रह राशि दिए जाने की सिफारिश की थी।

पुलिस, बिजली और पानी के कर्मचारी भी हकदार
अदालत ने अपने पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोविड ड्यूटी शब्द की व्याख्या इतनी सीमित नहीं की जा सकती कि इसमें केवल अस्पतालों में मरीजों के इलाज में सीधे तौर पर लगे लोगों को ही शामिल किया जाए। अदालत ने कहा कि महामारी के दौरान पुलिस, बिजली, जल आपूर्ति, टेलीफोन और अन्य आवश्यक सेवाओं वाले विभागों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को कोविड ड्यूटी पर तैनात माना जाना चाहिए क्योंकि उनके कार्यों से राज्य को बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिली तथा मरीजों के इलाज व सुरक्षा में सहयोग मिला।

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