थाने वाली मस्जिद पर बढ़ा विवाद: पैमाइश में थाना परिसर की जमीन पर निकला निर्माण, इमाम को 7 दिन का अल्टीमेटम

Edited By Anil Kapoor,Updated: 15 Jun, 2026 09:02 AM

controversy erupts after claims that a mosque was being built on police station

मेरठ जिले के खरखौदा क्षेत्र में थाना परिसर की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण के जरिए बनाई गई एक मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मस्जिद के इमाम को 7 दिन में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने...

Meerut News: मेरठ जिले के खरखौदा क्षेत्र में थाना परिसर की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण के जरिए बनाई गई एक मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मस्जिद के इमाम को 7 दिन में संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने और कथित अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया है।

थाने वाली मस्जिद की जमीन के दस्तावेज नहीं दे पाए इमाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खरखौदा थाना परिसर में स्थित और स्थानीय स्तर पर थाने वाली मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध जामा मस्जिद की भूमि की पैमाइश के दौरान पता चला कि मस्जिद का निर्माण थाने की भूमि पर किया गया है। इसके बाद पुलिस ने मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार से स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन पुलिस का दावा है कि रविवार शाम तक कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

खसरा नंबर 1217 की जमीन पर निर्माण हटाने का नोटिस
पुलिस के मुताबिक, मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर स्थित खरखौदा थाना आजादी से पहले का है और राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 1217 की 6,450 वर्ग मीटर भूमि लंबे समय से थाना परिसर के नाम दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि इसी भूमि पर बाद में मस्जिद का निर्माण किया गया। किठौर क्षेत्राधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट में भूमि थाना परिसर की बताई गई है और वैधानिक कार्रवाई के तहत इमाम को नोटिस देकर 7 दिन में कथित अवैध निर्माण हटाने और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। खरखोदा के थाना प्रभारी राजपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को नोटिस दिया गया है, जिसमें 7 दिन की मोहलत दी गई है, फिलहाल नोटिस का कोई जवाब नहीं आया है।

'1985 से वक्फ बोर्ड में दर्ज है मस्जिद की संपत्ति'
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिजीत कुमार ने  एक न्यूज एजेंसी से कहा कि मस्जिद कई वर्ष पुरानी है। हाल ही में थाने की पैमाइश कराई गई तो इस बारे में पता चला। फिलहाल नोटिस दिया गया है। वहीं, मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार ने पुलिस के दावों का खंडन करते हुए कहा कि वर्ष 1985 में संबंधित भूमि वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो चुकी थी और इसके प्रमाण उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं तथा मस्जिद वक्फ संपत्ति है।

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