100 करोड़ की जमीन और 3 JCB मशीनें, 38 साल बाद खत्म हुआ अवैध कब्जा, कोर्ट के फैसले से भू-माफिया में हड़कंप

Edited By Anil Kapoor,Updated: 28 Jul, 2026 12:54 PM

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों के विरुद्ध नगर निगम का अभियान जारी है। इसी क्रम में सोमवार को बीएलडब्ल्यू रोड स्थित ककरमत्ता क्षेत्र में करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करा लिया गया। बाजार मूल्य के अनुसार इस...

Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों के विरुद्ध नगर निगम का अभियान जारी है। इसी क्रम में सोमवार को बीएलडब्ल्यू रोड स्थित ककरमत्ता क्षेत्र में करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करा लिया गया। बाजार मूल्य के अनुसार इस भूमि की कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके साथ ही 38 वर्षों से चला आ रहा भूमि विवाद भी समाप्त हो गया।

नगर निगम के अनुसार यह मामला मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) स्थित अराजी संख्या 411 से संबंधित है। इस भूमि को लेकर रामनरायन पुत्र स्वर्गीय गज्जन ने वर्ष 1988 में उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य पक्षकारों के विरुद्ध धारा 229(ख) के तहत भूमिधरी अधिकार का दावा प्रस्तुत किया था। वादी का कहना था कि उसके दादा पुनवासी फसली वर्ष 1356 एवं 1359 से उक्त भूमि पर काबिज थे, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर घोषित किया जाए। इस मामले में लंबे समय तक विभिन्न स्तरों पर अपील और निगरानी याचिकाएं दाखिल होती रहीं। महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर नगर निगम ने प्रकरण की प्रभावी पैरवी की। अतिरिक्त उपजिलाधिकारी (सदर) प्रज्ञा सिंह की अदालत ने वाद संख्या 1987/2025 की सुनवाई के दौरान पत्रावली एवं राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया।

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अदालत ने पाया कि फसली वर्ष 1356 एवं 1359 के खसरे के कॉलम-8 में‘सिंघाड़ा'तथा कॉलम-19 में‘पोखरी'दर्ज है। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 132 के अनुसार पोखरी और तालाब सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि धारा 132 के तहत सार्वजनिक उपयोग की पोखरी भूमि पर किसी असामी को पांच वर्ष से अधिक अवधि के लिए पट्टा नहीं दिया जा सकता और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है। अदालत ने वादी का दावा निरस्त करते हुए अराजी संख्या 411 से संबंधित सभी खातों के नाम निरस्त करने तथा राजस्व अभिलेखों में भूमि को पुन: पोखरी के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में महापौर के निर्देश पर सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में नगर निगम के राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर कारर्वाई की। भू-माफिया द्वारा कूड़े से पाट दिए गए तालाब की खुदाई के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगाई गईं, ताकि उसे पुन: उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जा सके। नगर निगम ने बताया कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर स्थित पोखरे का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इससे भू-गर्भ जलस्तर में सुधार होने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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