सपा के पूर्व सांसद रिजवान जहीर को बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने रद्द की गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई, पुलिस की थ्योरी को बताया दुर्भावनापूर्ण

Edited By Anil Kapoor,Updated: 04 Jun, 2026 07:31 AM

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि....

Lucknow News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि अधिकारी कानून को लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहे हैं। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने अपील स्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री यह स्थापित नहीं करती है कि आरोपियों की कथित गतिविधियों ने सार्वजनिक व्यवस्था को अस्थिर किया था या अनुचित आर्थिक या अन्य भौतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया था। अदालत ने 26 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और 29 मई को फैसला सुनाया।

पुलिस के गैंगचार्ट और FIR के विरोधाभास पर हाईकोर्ट सख्त
यह मामला बलरामपुर जिले के तुलसीपुर पुलिस थाना में गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज एक प्राथमिकी से जड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस द्वारा तैयार गिरोह सूची में रमीज नेमत को गिरोह का सरगना और रिज़वान जहीर को सदस्य बताया गया। गिरोह सूची 2 आपराधिक मामलों पर आधारित थी। एक मामला 2022 का था जिसमें हत्या के प्रयास के आरोप थे और दूसरा मामला 2023 में दर्ज हत्या का था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता बी ए खान ने दलील दी कि थाना प्रभारी ने 7 जुलाई 2024 को स्वयं गिरोह सूची (गैंगचार्ट) तैयार की, जबकि प्राथमिकी में कहा गया कि उन्हें 20 जुलाई 2024 को गश्त के दौरान गिरोह की जानकारी मिली। उच्च न्यायालय ने इस विरोधाभास को गंभीर मानते हुए कहा कि प्राथमिकी में दी जानकारी प्रथम दृष्टया अविश्वसनीय प्रतीत होती है और इससे पुलिस की दुर्भावना झलकती है।

कोर्ट को दिखे पुलिसिया दुर्भावना के संकेत
अदालत ने विरोधाभास को अहम माना और पाया कि प्राथमिकी में शामिल वर्णित घटनाक्रम स्वाभाविक रूप से असंभव प्रतीत होता है, जो पुलिस द्वारा दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का संकेत देता है। याचिका का विरोध करते हुए, अतिरिक्त सरकारी वकील जी.डी. भट्ट ने दलील दी कि आरोपियों ने क्षेत्र में काफी प्रभाव और आतंक फैलाया, लोगों को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करने से हतोत्साहित किया। उन्होंने दलील दी कि गैंगस्टर अधिनियम के तहत सभी प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि यह दिखाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं रखी गई कि कथित कृत्यों ने सार्वजनिक शांति को प्रभावित किया था या सामान्य सामुदायिक जीवन को बाधित किया था।

हाईकोर्ट ने चार्जशीट और समन आदेश किया रद्द
अदालत ने कहा कि यह स्थापित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया कि गिरोह सूची में उद्धृत हत्या का मामला आर्थिक लाभ के लिए किया गया था। पीठ ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और सुनवाई अदालत ने अधिनियम और 2021 नियमों के तहत अनिवार्य संतुष्टि दर्ज किए बिना यांत्रिक रूप से आगे बढ़े। उच्चत न्यायालय ने इसके मद्देनजर आरोप पत्र, संज्ञान आदेश और विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित समन आदेश को रद्द कर दिया, जिससे रिजवान जहीर और रमीज नेमत के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम की कार्यवाही समाप्त हो गई।

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