विदेश जाने वाले धन का एक हिस्सा भारत के खिलाफ आतंकवाद भड़काने में होता है इस्तेमाल : CM योगी

Edited By Ramkesh,Updated: 17 Aug, 2026 07:16 PM

a part of the money going abroad is used to incite terrorism against india cm y

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोगों का स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए दावा किया कि विदेशी उत्पादों के बदले चुकाये गये धन का एक हिस्सा भारत के खिलाफ आतंकवाद भड़काने में किया जाता है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोगों का स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए दावा किया कि विदेशी उत्पादों के बदले चुकाये गये धन का एक हिस्सा भारत के खिलाफ आतंकवाद भड़काने में किया जाता है। आदित्यनाथ ने लोकभवन में 'सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी' के तहत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक (प्रतिक्रिया) प्रणाली का उद्घाटन करने के बाद अपने सम्बोधन में कहा कि राज्य सरकार की 'एक जिला—एक उत्पाद' योजना के तहत स्वदेशी उत्पाद रखकर होली-दीवाली समेत विभिन्न त्योहारों पर भी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता दें तो स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी भी प्रोत्साहित होगा, साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक उन्होंने कहा, ''जब हमारा धन विदेशों में जाता है तो उसका एक हिस्सा हमारे खिलाफ ही आतंकवाद को भड़काने और भारत को अस्थिर करने में खर्च होता है।'' आदित्यनाथ ने अपील की कि स्वदेशी को प्राथमिकता दी जाए, 'लोकल को ग्लोबल' बनाने की दिशा में प्रयास करें और यह अभियान गांव में भी प्रारंभ हो सकता है। उन्होंने राज्य की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले सपा के नेता और कार्यकर्ता गरीब लोगों का राशन कार्ड हड़प लेते थे।

मुख्यमंत्री ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा, ''2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, जिससे वह भूख से मरता था परंतु अब ऐसी स्थिति नहीं है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है और निराश्रितों एवं दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है।

आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उचित दर मूल्य के विक्रेता मेहनत करते थे लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था और शासन की लूट का खामियाजा इन विक्रेताओं को भुगतना पड़ता था। उन्होंने कहा, ''लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी (उत्तर प्रदेश) की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी।'' मुख्यमंत्री ने कहा, ''नौजवान, व्यापारी, बेटियां समेत आमजन अन्य प्रदेश में जाते थे तो कोई सम्मान नहीं करता था। साल 2017 के पहले जो लोग उत्तर प्रदेश से दूरी बनाते थे, पिछले साढ़े नौ वर्ष के भीतर वही लोग अब यूपी वालों को गले लगाते हैं।

 मुख्यमंत्री ने सपा का नाम लिए बिना निशाना साधा और कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया।'' मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति कुंतल) की व्यवस्था की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि उचित दर विक्रेता दुनिया की सबसे बड़ी योजना (राशन वितरण) के जरिए शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं।

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