Edited By Punjab Kesari,Updated: 13 Apr, 2018 06:28 PM

उत्तराखंड में आईसीएसई के स्कूलों में भी एनसीईआरटी की किताबों की लागू करवाने की कवायद शुरू हो गई है। इन दिनों शिक्षा मंत्रालय इस पर गहन विचार में जुटा हुआ है।
देहरादून: उत्तराखंड में आईसीएसई के स्कूलों में भी एनसीईआरटी की किताबों की लागू करवाने की कवायद शुरू हो गई है। इन दिनों शिक्षा मंत्रालय इस पर गहन विचार में जुटा हुआ है। राज्य में इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू होने के बाद अभिभावकों की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। अभिभावक संघ की ओर से इस संबंध में शिक्षामंत्री अरविंद पांडे को ज्ञापन भी सौंपा गया है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून के साथ ही मसूरी और नैनीताल में भी बड़े निजी स्कूल आईसीएसई बोर्ड के अन्तर्गत संचालित होते हैं। इनमें से कई स्कूल आजादी से पहले के स्थापित हैं। इन स्कूलों में आईसीएसई का अपना पाठ्यक्रम है। इस वर्ष तो सरकार ने इनको भी नहीं छेड़ा और सीबीएसई के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करवाई। सरकार को भय था कि बड़े रसूख वाले यह स्कूल विरोध में उतरे और इनमें एनसीईआरटी की किताबें लागू ना करवा पाए तो इससे गलत संदेश जाएगा और सीबीएसई के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू नहीं हो पाएंगी। इसलिए पहले सीबीएसई के स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के लिए चुना गया। राज्य में आईसीएसई, सीबीएसई और उत्तराखंड बोर्ड के स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें आईसीएसई और सीबीएसई का अपना-अपना पाठ्यक्रम था, जबकि सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू थी।
बता दें कि इस वर्ष शिक्षामंत्री ने सीबीएसई के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश दिए। हालांकि निजी स्कूल प्रबंधकों ने विरोध किया लेकिन शिक्षा मंत्री के अपनी बात पर अडिग रहने के कारण निजी स्कूलों को झुकना पड़ा।