Edited By Purnima Singh,Updated: 22 Mar, 2026 03:58 PM

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि जब-जब और जहां-जहां बसपा मजबूत हुई है, वहां दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) एवं अल्पसंख्यक समाज का भरपूर भला हुआ है। मायावती यहां...
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि जब-जब और जहां-जहां बसपा मजबूत हुई है, वहां दलित, आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) एवं अल्पसंख्यक समाज का भरपूर भला हुआ है। मायावती यहां मध्यप्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ राज्य इकाइयों के पदाधिकारियों की एक विशेष बैठक को संबोधित कर रही थीं। पार्टी द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन राज्यों के लिए मुख्य सेक्टर प्रभारी एवं पूर्व सांसद राजाराम के नेतृत्व में आए पदाधिकारियों से उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी ली। समीक्षा के आधार पर उन्होंने पाया कि निर्देशों के अनुपालन के मामले में तीनों राज्यों में कुछ प्रगति हुई है।
बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बहुजनों की सुरक्षा, सम्मान और अस्मिता के मिशनरी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पूरी मुस्तैदी से कार्य करते हुए चुनावी सफलता हासिल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ''जब-जब और जहां-जहां बसपा मजबूत हुई है, वहां दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के लोगों का भरपूर भला हुआ है।'' मायावती ने भीमराव आंबेडकर और पार्टी संस्थापक कांशीराम को याद करते हुए कहा, ''देशभर में बहुजनों के हित, कल्याण और उत्थान के लिए तथा उन्हें आत्मसम्मान के साथ समतामूलक समाज में जीवन जीने का अधिकार दिलाने हेतु बाबा साहेब ने जो अनेक कानूनी और संवैधानिक अधिकार दिए, उन्हें सही ढंग से लागू कराने के लिए सत्ता की ''मास्टर चाबी'' स्वयं के हाथ में लेना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से कांशीराम ने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया और उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए पार्टी पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। मायावती ने तीनों राज्यों में कार्यकर्ताओं द्वारा लगन और निष्ठा के साथ आंबेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने और शासक वर्ग बनने के लक्ष्य के लिए संघर्षरत रहने की सराहना की। बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे समय में, जब सत्ताधारी दल समाज और सत्ता में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग सहित साम, दाम, दंड और भेद जैसे सभी हथकंडे अपनाने पर आमादा हैं, तब विशेष रूप से दलित और ओबीसी सहित बहुजन समाज के प्रत्येक वर्ग को चुनावी सफलता के लिए पूरी ताकत से जुटना होगा।