सीएम युवा योजना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस वर्ष 1.5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य

Edited By Sahil Kumar,Updated: 16 Apr, 2026 04:54 PM

cm yuva yojana increase youth participation target 1 5 lakh youth this year

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने सीएम युवा योजना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस वर्ष 1.5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें बैंकिंग...

UP NEWS:  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने सीएम युवा योजना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस वर्ष 1.5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया में सक्षम बनाने के उद्देश्य से गोमतीनगर में सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर्स (सीसीसी) की विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई।

हले बैच में 50 जिलों और दूसरे बैच में 25 जिलों को शामिल किया गया है। यूपीकॉन के सभी कर्मचारियों को इस प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे जमीनी स्तर पर युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद कुल 90 सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे। ये काउंसलर सीएम युवा योजना के तहत ऋण लेने वाले लाभार्थियों को बैंकिंग प्रक्रियाओं, दस्तावेजीकरण और प्रोजेक्ट तैयार करने में मदद करेंगे, जिससे युवाओं को आसानी से ऋण प्राप्त हो सके।

काउंसलर्स निभाएंगे सेतु की भूमिका
यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह ने बताया कि सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर एमएसएमई उद्यमियों और बैंकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। वे न केवल उद्यमियों को उपयुक्त ऋण योजनाओं की जानकारी देंगे, बल्कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट, वित्तीय विवरण और आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करने में भी सहयोग करेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में क्रेडिट रेटिंग, सिबिल स्कोर और ग्रीन एवं नए प्रोजेक्ट्स के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही वित्तीय योजना और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के माध्यम से युवा उद्यमी न केवल आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को भी सफल बना सकते हैं।

रोजगार और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा
यह पहल न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अनुभवी पेशेवरों विशेषकर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों को भी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती है। प्रदेश सरकार की यह पहल वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करते हुए एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी। आने वाले समय में यह मॉडल प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनेगा।

एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा मजबूती का आधार
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सीसीसी कोर्स रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  द्वारा अनुमोदित है, जिसे प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर योजना आरबीआई की वित्तीय समावेशन समिति की सिफारिशों पर आधारित है। इसका उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और उन्हें ऋण प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। इस ढांचे के अंतर्गत सिड्बी को एक्रीडिटिंग एजेंसी और इंप्लीमेंटिंग एंड रजिस्टरिंग अथॉरिटी की भूमिका दी गई है, जबकि आईआईबीएफ  द्वारा इस कोर्स को विकसित किया गया है। यह सर्टिफिकेशन प्राप्त करना सीसीसी बनने के लिए अनिवार्य है।

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