योगी सरकार का भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार, कमीशनखोरी करने वाले 2 अधिकारी सस्पेंड, पद का दुरुपयोग भी किया

Edited By Purnima Singh,Updated: 31 May, 2026 01:56 PM

cm yogi suspends two officials over corruption

उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त नीति को आगे बढ़ाते हुए व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। गंभीर आरोपों में घिरे विभाग के सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा और प्रधान सहायक इमरान अहमद को तत्काल प्रभाव से...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त नीति को आगे बढ़ाते हुए व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। गंभीर आरोपों में घिरे विभाग के सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा और प्रधान सहायक इमरान अहमद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का अहम कदम माना जा रहा है।

प्रमुख सचिव के आदेश पर हुआ निलंबन
जानकारी के अनुसार, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए। इसके बाद प्रशिक्षण निदेशक अभिषेक सिंह ने आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कराया। विभागीय स्तर पर मिली शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

तबादलों के नाम पर धन उगाही के आरोप
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा पर स्थानांतरण प्रक्रिया में अनियमितताओं, कमीशनखोरी और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि तबादलों को प्रभावित करने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों से धन की मांग की जाती थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में यह भी दावा किया गया है कि स्थानांतरण कराने के बदले कथित तौर पर निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से रकम वसूली जाती थी।

प्रधान सहायक पर उत्पीड़न और भेदभाव के आरोप
प्रधान सहायक इमरान अहमद के खिलाफ भी कई गंभीर शिकायतें दर्ज की गई थीं। उन पर भ्रष्टाचार के अलावा कर्मचारियों के उत्पीड़न और धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए गए हैं। विभागीय स्तर पर हुई जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में संगठित तरीके से काम करते हुए विभागीय प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

शिकायतों के जरिए दबाव बनाकर वसूली का आरोप
आरोपों के अनुसार विभाग में अलग-अलग नामों से शिकायतें दर्ज कराई जाती थीं। बाद में उन्हीं शिकायतों के निस्तारण, जांच प्रभावित करने या कार्रवाई रोकने के नाम पर संबंधित कर्मचारियों से धन की मांग की जाती थी। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के जरिए विभाग में भय और दबाव का माहौल बनाकर कथित रूप से अवैध वसूली की जाती थी।

विभागीय जांच जारी, और कार्रवाई के संकेत
सरकारी आदेश के तहत निलंबन अवधि में सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा को देवीपाटन मंडल से संबद्ध किया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

विभाग में मचा हड़कंप
दो अधिकारियों के निलंबन के बाद व्यावसायिक शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों के बीच इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामलों में अब और अधिक सख्ती के साथ कदम उठा रही है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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