'सोशल मीडिया की हर बात सच नहीं होती...' CM Yogi ने चेताया, बोले- 'अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ आगे आएं शिक्षक'

Edited By Anil Kapoor,Updated: 26 Jul, 2026 02:18 PM

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों और उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान करते हुए कहा कि यदि देश के भीतर विरोधी ताकतें षड्यंत्र रचकर अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करें, तो ऐसे प्रयासों के खिलाफ शिक्षक समाज को मजबूती से खड़ा होना होगा।...

Agra News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों और उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान करते हुए कहा कि यदि देश के भीतर विरोधी ताकतें षड्यंत्र रचकर अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करें, तो ऐसे प्रयासों के खिलाफ शिक्षक समाज को मजबूती से खड़ा होना होगा। आगरा दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने यहां उच्च शिक्षा विभाग के 7.50 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना की शुरुआत के बाद आयोजित समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षक का स्थान सर्वोच्च रहा है। चाहे वह शासकीय व्यवस्था का हिस्सा रहे हों या गुरुकुल परंपरा का, गुरु का महत्व सदैव सर्वोपरि रहा है।

गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जिन लोगों को भारत की प्रगति अच्छी नहीं लगती, वे किसी न किसी रूप में समाज में विद्वेष फैलाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ताकतों के पास आधुनिक तकनीक भी है और भारत-विरोधी ताकतों से मिलने वाला धन भी। वे इनका दुरुपयोग कर देश में अव्यवस्था का माहौल बनाने और लोगों को दिग्भ्रमित करने की कोशिश करेंगे।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आगाह करते हुए कहा कि याद रखिए, दिग्भ्रमित समाज अंततः नकारात्मकता से भर जाता है और अपने ही हितों को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए सतर्क रहना होगा। उन्होंने शिक्षकों से छात्रों में राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारे शिक्षण संस्थान, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय राष्ट्रभक्ति तथा राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा के केंद्र बनें। विश्वविद्यालयों के प्रकाशन केंद्र समाज की उपलब्धियों और सफलताओं के उदाहरणों से समृद्ध हों।

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षकों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम ऐसा करेंगे तो वर्तमान और भावी पीढ़ियां आपको श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करेंगी तथा आपके प्रति कृतज्ञ रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी भारत ने सही दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया, तभी उस पर प्रत्यक्ष और परोक्ष विदेशी हमले हुए। भारत पर आक्रमण उस समय शुरू हुए, जब वह समृद्धि के स्वर्णिम दौर में था और बाद में षड्यंत्रों के कारण उसे गुलामी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि भारत के भीतर कोई षड्यंत्र रचकर अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ शिक्षक समाज को आगे आना होगा। युवाओं को जागरूक करना पड़ेगा।

शिक्षण को रोचक बनाने की सलाह देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कक्षा उबाऊ हो जाती है तो विद्यार्थी उससे दूरी बनाने लगते हैं। एक शिक्षक को स्वयं को छात्र के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए। भारत में जब-जब शिक्षकों के प्रति सम्मान बढ़ा है, तब-तब देश ने नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में समाचार-पत्रों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी का बड़ा वर्ग जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि करीब 60 प्रतिशत लोग अपने स्मार्टफोन के माध्यम से देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त करते हैं। विद्यार्थी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी को सत्य मान लेते हैं, जबकि यह आवश्यक नहीं कि वह सही ही हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए किस प्रकार समाज में विद्वेष फैलाया जा सकता है, इसके अनेक उदाहरण सामने आए हैं। जब पूरा तंत्र अराजकता और अव्यवस्था का शिकार होता है तो उसका दुष्प्रभाव वर्तमान के साथ-साथ भविष्य पर भी पड़ता है। ऐसे समय में शिक्षक समाज को आगे आना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षकों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। प्रत्येक शिक्षक और छात्र को कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में दक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसा कोई अक्षर नहीं, जिससे मंत्र न बन सके; ऐसी कोई वनस्पति नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों; और ऐसा कोई मनुष्य नहीं, जिसमें योग्यता न हो।

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उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, लेकिन उसे पहचानने और निखारने वाला चाहिए। जिस प्रकार वनस्पति के गुणों को पहचानने के लिए वैद्य और अक्षरों को शब्दों में पिरोने के लिए भाषाशास्त्री की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रतिभा को विकसित करने के लिए शिक्षक की आवश्यकता होती है। भारतीय परंपरा में इसी कारण गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, ताकि वह व्यक्ति के गुणों को उजागर कर उसे सन्मार्ग की ओर अग्रसर कर सके। समारोह को केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर आगरा के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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