राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: 18 हजार की सैलरी... गोबर के ढेर से निकले लाखों, 1.5 करोड़ की जमीन देख SIT हैरान

Edited By Anil Kapoor,Updated: 14 Jun, 2026 08:05 AM

ram temple offering scam 18 000 rupees in salary lakhs found in cow dung heap

अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी का मामला अब काफी गंभीर हो चला है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक हाई-लेवल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT)...

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी का मामला अब काफी गंभीर हो चला है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक हाई-लेवल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। दूसरी तरफ, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने मंदिर के एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच टीम ने जब रुदौली के शुजागंज क्षेत्र में रहने वाले आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि चोरों और जांच एजेंसियों से बचने के लिए कुछ रकम तो घर की अलमारी में रखी गई थी, जबकि बाकी के पैसे बाहर गोबर के ढेर में दबाकर छिपाए गए थे। हालांकि, प्रशासन ने अभी इस बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक या अंतिम बयान जारी नहीं किया है। इस मामले में एक और संदिग्ध कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। ये दोनों ही कर्मचारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गिनने और उसकी देखरेख के काम में लगे थे।

महीने की तनख्वाह 18 हजार, लेकिन खरीद डाली करोड़ों की जमीन
जांच एजेंसियों के रडार पर इन कर्मचारियों की कमाई और संपत्ति का यह अंतर सबसे पहले आया। बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों की मासिक सैलरी महज 18 से 20 हजार रुपए के बीच थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इनकी माली हालत अचानक से बदल गई। जांच में सामने आया है कि एक कर्मचारी ने हाल ही में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की भारी-भरकम कीमत वाली जमीन खरीदी, जबकि दूसरे ने भी लगभग 40 लाख रुपए का एक प्लॉट अपने नाम किया। इतनी कम सैलरी में इतनी बड़ी संपत्तियां खड़ा करना ही जांच एजेंसियों के शक की सबसे बड़ी वजह बना।

पिता का दावा- बेटा निर्दोष है, जमीन गिरवी रखकर जुटाए पैसे
इस बीच, आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव किया है। उन्होंने घर से 10 लाख रुपए मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताया। बच्चूलाल का कहना है कि फैजाबाद में जो मकान बन रहा है, उससे उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मकान बनवाने के लिए उन्होंने अपनी खुद की खेती की जमीन गिरवी रखी थी, जिससे यह रकम आई है। दूसरी ओर, गांव वालों का कहना कुछ और ही है। ग्रामीणों के मुताबिक, जांच टीम में 6 लोग शामिल थे (2 पुलिस की वर्दी में और 4 सादे कपड़ों में)। गांव में यह चर्चा आम है कि राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद से ही लवकुश के ठाट-बाट और आर्थिक स्थिति में अचानक बहुत बड़ा उछाल आया था।

IAS अफसर के हाथ में कमान, नृपेंद्र मिश्र ने साधी चुप्पी
मामले के तूल पकड़ने के बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी 5 दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे। हालांकि, जब उनसे इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि उनका काम सिर्फ और सिर्फ मंदिर निर्माण के कार्यों की देखरेख करना है, वे इस मामले पर टिप्पणी नहीं करेंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की लिखित शिकायत और अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए जो SIT बनाई है, उसकी कमान एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी गई है। लखनऊ के कमिश्नर (IAS) विजय विश्वास पंत को इस जांच टीम का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ IPS किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। शासन ने इस टीम को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती (प्रारंभिक) रिपोर्ट और अगले 15 दिनों के अंदर पूरी अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपें।

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