'UP में ब्राह्मण समाज असुरक्षित…', मायावती को सताई ब्राह्मणों की चिंता, मंत्रिमंडल विस्तार पर BJP को घेरते हुए लिखी लंबी-चौड़ी पोस्ट

Edited By Purnima Singh,Updated: 11 May, 2026 07:16 PM

mayawati pens a lengthy post on the up cabinet expansion

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर सोमवार को टिप्पणी की कि इसका प्रभाव 'सर्व समाज' के हित में भी दिखना चाहिए, अन्यथा इसे राजनीतिक जुगाड़ और सरकारी संसाधनों पर...

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर सोमवार को टिप्पणी की कि इसका प्रभाव 'सर्व समाज' के हित में भी दिखना चाहिए, अन्यथा इसे राजनीतिक जुगाड़ और सरकारी संसाधनों पर बढ़ा हुआ 'बोझ' ही माना जाएगा। मायावती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक लंबे संदेश में कहा, ''वैसे तो मंत्रिमंडल में सदस्यों को कम करना या बढ़ाना सत्ताधारी पार्टी का आंतरिक राजनीतिक चिन्तन का मामला ज़्यादा होता है, किन्तु कुल मिलाकर इसका अच्छा प्रभाव आमजन के हित के साथ-साथ, ख़ासकर 'सर्व समाज' के ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों और युवाओं के जीवन की बेहतरी एवं महिला सुरक्षा-सम्मान आदि पर पड़ता हुआ दिखना भी जरूर चाहिये, अन्यथा लोग इसे राजनीतिक जुगाड़ तथा सरकारी संसाधन पर बढ़ा हुआ बोझ ही मान लेंगे।" 

मायावती ने इसी संदेश में आगे कहा कि यदि समाज के हर वर्गों, विशेषकर कमजोर तबकों के जान-माल एवं मजहब की रक्षा होती है और उन्हें न्याय मिलता है, तो यह सरकार के कार्यकलापों में भी परिलक्षित होना चाहिए, क्योंकि यह सरकारों एवं उनके मंत्रियों की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के द्वितीय कार्यकाल के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार के तहत रविवार को छह नये मंत्रियों ने शपथ ली, जबकि दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नत करके स्वतंत्र प्रभार दिया गया। 

मायावती ने पिछले दिनों लखनऊ में भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े ब्राह्मण समाज के एक स्थानीय नेता को गोली मारे जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे कानून-व्यवस्था के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि राज्य में ब्राह्मण समाज न केवल उपेक्षित, बल्कि काफी असुरक्षित भी है। बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में समाज के हर वर्ग के जान-माल एवं मजहब की रक्षा की गयी थी, जबकि बेहतरीन क़ानून-व्यवस्था के जरिये ब्राह्मण सहित समाज के सभी वर्गों को 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति के तहत न्याय और सुरक्षा प्रदान की गयी थी। 

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