कानपुर में 80 करोड़ का मेगा साइबर स्कैम: 3 महीने में 600 ठगी को दिया अंजाम, STF ने पंजाब से दबोचे 2 मास्टरमाइंड

Edited By Anil Kapoor,Updated: 19 Apr, 2026 09:33 AM

cyber  fraud gang busted in kanpur transactions worth 80 crore uncovered

Kanpur News: कानपुर नगर के नौबस्ता थाना पुलिस और एसटीएफ लखनऊ की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। जांच में गिरोह से जुड़े बैंक खातों में 3 माह के भीतर 80 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन का खुलासा...

Kanpur News: कानपुर नगर के नौबस्ता थाना पुलिस और एसटीएफ लखनऊ की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। जांच में गिरोह से जुड़े बैंक खातों में 3 माह के भीतर 80 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन का खुलासा हुआ है।

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पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने पत्रकारों को बताया कि यह कार्रवाई थाना नौबस्ता में दर्ज मुकदम में धारा 66डी आईटी एक्ट एवं 318(4)/111(3) बीएनएस की विवेचना के दौरान की गई। वादी को मोबाइल फोन पर फेसबुक के माध्यम से एक लिंक भेजा गया था, जिसमें शेयर ट्रेडिंग के लिये एक इक्विटी ग्रुप से जुड़ने को कहा गया। लिंक से जुड़ने के बाद उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया गया, जहां अधिक मुनाफे का लालच देकर उससे विभिन्न तिथियों में कुल सात लाख रुपये निवेश कराए गए। बाद में एप बंद कर दिया गया और धनराशि साइबर ठगी के जरिए हड़प ली गई। पीड़ति ने एनसीआरपी पोटर्ल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया।

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जांच में पता चला कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाते हुए नई दिल्ली स्थित एक खाते में 5वीं लेयर तक ट्रांसफर किया गया। संबंधित खाते के विरुद्ध देशभर में 600 से अधिक शिकायतें एनसीआरपी पोटर्ल पर दर्ज हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 13 एफआईआर दर्ज पाई गईं। इन मामलों में लगभग 26 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है। पुलिस ने बताया कि दिल्ली स्थित नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के एक खाते, जो ए.के. ट्रेड लिंक के नाम से संचालित था, में मात्र तीन माह के भीतर करीब 80 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए नौबस्ता पुलिस टीम ने पंजाब के फाजिल्का जनपद के अबोहर क्षेत्र में दबिश दी। जांच में सामने आया कि खाता अजय कुमार के नाम पर खुलवाया गया था, जबकि उसका संचालन करण कसेरा और गुलशन कुमार उर्फ लिटिल मोंगा व कालरा द्वारा किया जा रहा था। मुख्य खाताधारक अजय कुमार को पूर्व में दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।  पुलिस ने करण कसेरा (31) और गुलशन कुमार (29) को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों को पैसा दोगुना-तीन गुना करने का झांसा देकर ठगी करना स्वीकार किया। ठगी की रकम को 5वीं और छठी लेयर तक विभिन्न खातों में घुमाया जाता था, ताकि पुलिस कारर्वाई से बचा जा सके।

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बताया जा रहा है कि बरामद आईफोन मोबाइलों के विश्लेषण में कई व्हाट्सएप ग्रुप मिले, जिनमें विदेशी और भारतीय नंबरों के जरिए साइबर ठगी नेटवर्क संचालित होने के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार ठगी की रकम चेक और एटीएम के माध्यम से नकद निकालकर निजी उपयोग में लाई जाती थी। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से दो आईफोन, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, डिपॉजिट स्लिप, 11 चेक, एटीएम कार्ड, लेन-देन संबंधी दस्तावेज और 8,500 रुपए नकद बरामद किए हैं। प्रकरण में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश, बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है। 

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