राहुल गांधी पर FIR का आदेश: दोहरी नागरिकता विवाद में फंसे कांग्रेस नेता, अब केंद्रीय एजेंसी करेगी जांच

Edited By Anil Kapoor,Updated: 18 Apr, 2026 07:36 AM

directive to register fir against rahul gandhi in dual citizenship case

Lucknow News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ शुक्रवार को दोहरी नागरिकता के कथित विवाद के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि प्रथम सूचना...

Lucknow News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ शुक्रवार को दोहरी नागरिकता के कथित विवाद के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (प्राथमिकी) दर्ज होने के बाद राज्य सरकार किसी भी केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच करने का निर्देश दे सकती है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर यह आदेश पारित किया।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपों के प्रथम दृष्टया अवलोकन से संज्ञेय अपराध बनता है, इसलिए मामले की जांच आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने 28 जनवरी, 2026 को विशेष सांसद-विधायक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। सांसद/विधायक अदालत ने कहा था कि यह अदालत नागरिकता के मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए सक्षम नहीं है। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता व याचिकाकर्ता शिशिर ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच का अनुरोध किया था। उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कई आरोप लगाए हैं। यह अर्जी शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद/विधायक अदालत में दायर की गई थी लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था।

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लखनऊ की सांसद/विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में अपील की थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एस.बी. पांडे ने नागरिकता विवाद से जुड़े दस्तावेज पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता वी.के. सिंह ने भी यह स्वीकार किया कि आरोप प्रथम दृष्टया जांच योग्य हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने 2003 में ब्रिटेन में 'बैकऑप्स लिमिटेड' नामक कंपनी स्थापित की थी और कंपनी के दस्तावेजों में अपनी राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई थी। साथ ही, 2005 और 2006 के वार्षिक विवरणों में भी उनकी नागरिकता ब्रिटिश दर्ज होने का दावा किया गया है।

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याची ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी का नाम ब्रिटेन की मतदाता सूची में दर्ज रहा है और उन्होंने वहां की चुनावी प्रक्रिया में भाग लिया। इन आरोपों के आधार पर भारतीय दंड संहिता, शासकीय गुप्त बात अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई का अनुरोध किया गया। मामले की शुरुआत में याची ने रायबरेली की सांसद/विधायक अदालत में अर्जी दाखिल कर राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। वहां धमकी मिलने के बाद याची की याचिका पर उच्च न्यायालय ने मामला लखनऊ की सांसद/विधायक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। लखनऊ की सांसद/विधायक अदालत ने 28 जनवरी 2026 को याची की अर्जी खारिज कर दी थी और कहा था कि उसे नागरिकता संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी आदेश को याची ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

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